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सतनाः डिफाल्टर समितियों पर 20.16 करोड़ की देनदारी बकाया

12 साल में न दाेषियों पर कार्रवाई हुई, न राशि वसूली जा सकी

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सतना। समर्थन मूल्य पर होने वाली धान और गेहूं खरीदी में बड़े पैमाने पर गबन किया गया है। इस मामले में आज तक न तो राशि वसूली को लेकर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न दोषियों पर किसी तरह का दंड अधिरोपित किया गया। 2010-11 से 2022-23 तक सहकारी समितियों ने 20.16 करोड़ रुपए का गबन कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया है। इन 12 सालों में आज तक यह राशि नहीं वसूली जा सकी है। खानापूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारी महज पत्राचार कर इतिश्री कर लेते हैं। सवाल यह है कि इन समितियों का इतना बड़ा बकाया होने के बाद भी बिना वसूली के इन्हें समर्थन मूल्य खरीदी का काम कैसे दिया जा रहा है।

ऐसे चलती है प्रक्रिया

सहकारी समितियां समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान की खरीदी सरकार के लिए करती हैं। इसका भुगतान सरकार किसानों को सीधे करती है और समितियों द्वारा खरीदे गए अनाज को अपने गोदामों में जमा करवाती है, लेकिन समितियां अनाज की पूरी मात्रा गोदाम में जमा नहीं कराकर अपना हितों में ले लेती हैं। जितना अनाज जमा नहीं होता, वह सरकारी खजाने का नुकसान होता है। चूंकि समितियों पर नियंत्रण सहकारी बैंक का होता है, लिहाजा यह राशि वसूलने की जिम्मेदारी भी सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की होती है, लेकिन राशि जमा कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई गई।

एक पत्र लिखा और भूल गए

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सितंबर 2023 में 2010 से 2022 तक गेहूं और धान खरीदी में हुई शार्टेज राशि वसूली का हिसाब तैयार कराया था। यह आंकड़ा 20.16 करोड़ रुपए से ऊपर तक पहुंच गया। हालांकि सीईओ ने शाखा प्रबंधकों को पत्र लिख कर चुप्पी साध ली। न तो वसूली के लिए कोई दबाव बनाया और न वसूली नहीं होने की स्थिति पर कार्रवाई के लिए प्रशासक जिला सहकारी बैंक (जो कि कलेक्टर हैं) के पास कोई नस्ती पेश की।

यह है गेहूं की बकाया वसूली

सहकारी बैंक शाखा रामपुर पर 45.92 लाख, नागौद 41.25 लाख, कोटर 42.95 लाख, बिरसिंहपुर 46.91 लाख, अमरपाटन 1.28 करोड़, सिंहपुर 1.30 करोड़, कोठी 70.25 लाख, मझगवां 2.98 लाख, सतना 1.84 करोड़, मैहर 51.53 लाख, उचेहरा 18.97 लाख और रामनगर शाखा का 11.01 लाख रुपये बकाया है। इस तरह गेहूं का कुल बकाया 7.75 करोड़ रुपए हैं।

यह है धान की बकाया वसूली

सहकारी बैंक शाखा सिंहपुर में 47.12 लाख, अमरपाटन का 3.02 करोड़, रामपुर 84.81 लाख, कोठी का 59.99 लाख, कोटर 63.65 लाख, रामनगर 1.78 करोड़, नागौद 2.75 करोड़, उचेहरा 32.95 लाख, मझगवां 13.60 लाख, बिरसिंहपुर 91.50 लाख, मैहर 82.91 लाख रुपये बकाया है। इस तरह धान खरीदी शार्टेज की राशि 12.41 करोड़ रुपये की वसूली बकाया है।

उपार्जन समिति भी दोषी

समितियों से यह वसूली बड़ी आसानी से हो जाती अगर जिला उपार्जन समिति खरीदी केंद्र देने से पहले सहकारी समितियों की बकाया की जानकारी जिला सहकारी बैंक से प्राप्त करती। लेकिन, जिला उपार्जन समिति में नोडल बन कर बैठे फूड विभाग के अफसर समितियों के बकाया की पूरी जानकारी नहीं लेते हैं। जबकि नियमों में स्पष्ट लिखा है कि उसी समिति को काम दिया जाए जिन पर आर्थिक अनियमितता न हो।

'' जिला सहकारी बैंक से बकाया राशि की जानकारी ली जाकर वसूली की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। जिन समितियों से राशि नहीं जमा होगी उन्हें खरीदी का काम नहीं दिया जाएगा ''- अनुराग वर्मा, कलेक्टर एवं प्रशासक जिला सहकारी बैंक