
Kurmi Kshatriya Samaj started agitation against police
सतना. लूट के कथित मामले में आरोपी पुलिस अधिकारी के खिलाफ अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए जाने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश कुर्मी क्षत्रिय समाज ने सेमरिया चौक में प्रदर्शन करते हुए एक ज्ञापन बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को दिया है। इसके बाद ज्ञापन की एक प्रति जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर मौके में उपस्थित अधिकारी को दी गई। प्रदर्शन के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल भी मौजूद रहा।
गौरतलब है कि उतैली निवासी राजेश सिंह ने 20 जनवरी को शिकायत की थी कि 8-10 की संख्या में दो लग्जरी वाहनों में सवार होकर आए बदमाशों ने उनके साथ 1 लाख 90 हजार रुपए की लूट की है। इस घटना में सहायक उपनिरीक्षक अशोक सिंह सेंगर की भी सहभागिता रही है। राजेश सिंह मध्य प्रदेश कुर्मी क्षत्रिय समाज के जिला अध्यक्ष हैं इसलिए संगठन उनके साथ खड़ा हो गया। संगठन ने थाने में आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कराए जाने का प्रयास किया लेकिन जब बात नहीं बनी तो संगठन के एक प्रतिनिधि मंडल ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर अपना पक्ष रखा। पुलिस अधीक्षक ने प्रकरण में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिला कर जांच की जिम्मेदारी डीएसपी को सौंप दी। इसके बाद संगठन की ओर से बयान सामने आया कि जांच का बहाना कर संबंधित पुलिस अधिकारी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच के नाम पर फरियादी और उनके समर्थकों को ही डराया धमकाया जा रहा है इसलिए मामले की शिकायत रीवा रेंज के आईजी पुलिस चंचल शेखर से की जाएगी। इसके बाद 1 फरवरी से आंदोलन होगा।
एफआइआर दर्ज करने की मांग
विगत दिनों संगठन ने रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक से मिलकर अपनी बात रखी जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित सहायक उप निरीक्षक अशोक सिंह को निलंबित कर दिया। विभागीय स्तर पर यह मामला अब जांच में है। लेकिन संगठन की मांग है कि आरोपियों के खिलाफ लूट का अपराध पंजीबद्ध किया जाए। इसी संबंध में संगठन ने पूर्व तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक न्याय के लिए एक रैली शहर में निकालने का निर्णय लेकर जिला प्रशासन से इसके लिए विधिवत अनुमति मांगी। अनुमति प्राप्त होने पर संगठन के लोग रैली के लिए जब सेमरिया चौक पर इक_ा हुए तो पता चला कि अनुमति निरस्त कर दी गई है। इस स्थिति में संगठन ने रैली को रद्द करते हुए सेमरिया चौक में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और इस दौरान अपना ज्ञापन बाबा साहब की प्रतिमा सहित प्रशासन को दिया।
14 को एसपी ऑफिस का घेराव
संगठन ने आंदोलन के लिए जो रूपरेखा बनाई है उसके मुताबिक अगर एफआइआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो आगामी 9 से 13 फरवरी तक क्रमिक अनशन होगा। इसके बाद 14 फरवरी को एसपी ऑफिस का घेराव कर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
भंग हो रही थी शांति, तो कर लेते गिरफ्तार
प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने अचानक रैली की अनुमति निरस्त किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पुलिस के विरोध में रैली को रोकने के लिए ऐसा किया गया है। सवाल किया गया कि अगर अनुमति दी गई थी तो रद्द क्यों की गई? क्या शांति भंग होने या अप्रिय स्थिति निर्मित होने की आशंका थी? अगर यही वजह है तो इसके लिए संगठन के लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं कर लिया गया? पदाधिकारियों ने कहा कि हमने शांतिपूर्ण रैली निकालने का निर्णय लिया था प्रशासन ने इसके लिए हमें सशर्त अनुमति दी थी। शर्त थी की रैली से यातायात बाधित नहीं होगा। अस्त्र-शस्त्र या अन्य आपत्तिजनक चीजों का रैली में प्रदर्शन नहीं होगा। डीजे नहीं बजाया जाएगा। संगठन, रैली के दौरान यदि इन शर्तों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता तो प्रशासन संगठन पर कार्यवाही के लिए स्वतंत्र था लेकिन प्रशासन ने पहले ही अपना आदेश यह कहकर निरस्त कर दिया कि नगर पुलिस अधीक्षक एवं सिटी कोतवाली टीआई ने कानून व्यवस्था एवं शांति व्यवस्था के मद्देनजर कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं देने की अनुशंसा की है।
आरोप: दबाई जा रही आवाज
संगठन के लोगों ने सवाल किया कि अनुमति देने से पहले क्या सक्षम अधिकारी ने संबंधित जनों से उनका अभिमत प्राप्त नहीं किया था। यदि प्राप्त किया था तो उनकी कार्यक्रम को लेकर आपत्ति होने पर अनुमति कैसे दे दी गई थी और यदि बिना अभिमत लिए अनुमति दी गई थी तो क्यों? आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग कर इस घटनाक्रम को दबाने की कोशिश कर रहे हैं, वे नहीं चाहते कि पुलिस अधिकारी पर लूट का मामला दर्ज हो जिससे पुलिस की साख पर दाग लगे। इसीलिए संगठन की आवाज को दबाने रैली की अनुमति निरस्त कराई गई है। संगठन के संरक्षक ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने सवाल किया कि यदि विभागीय अधिकारी संबंधित पुलिस अधिकारी को मामले में संलिप्त नहीं मानते हैं तो उसे उन्होंने निलंबित क्यों किया है और यदि अधिकारियों को लगता है कि संबंधित एएसआइ की भूमिका संदिग्ध है तो फिर उसके खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करने में विलंब क्यों किया जा रहा है?

Published on:
01 Feb 2020 10:19 pm
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