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पुलिस वाहन में मिला सागौन, तस्करी की आशंका, वन अफसर बोले- हमने कार्रवाई नहीं की

पुलिस पर सागौन तस्करी के आरोप की सूचना जैसे ही वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तो उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही। वहीं वन विभाग के दो रेंजर इस कार्रवाई की जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।

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सागर

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Rizwan ansari

Apr 06, 2025

sagar

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पुलिस के वाहन से सागौन की तस्करी के आरोप के साथ एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। पुलिस के जिस वाहन में सागौन की लकड़ियां भरी हुईं दिख रहीं हैं, वह वाहन बंडा पुलिस के अधीन बताया जा रहा है। पुलिस पर सागौन तस्करी के आरोप की सूचना जैसे ही वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, तो उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही। वहीं वन विभाग के दो रेंजर इस कार्रवाई की जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।

अप्रेल की बताई जा रही कार्रवाई

वायरल फोटो 1 अप्रेल की बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार बंडा पुलिस के जेल वाहन में सागौन की लकड़ियां भरी थीं। मुखबिर से सूचना के बाद उक्त वाहन को रुरावन गांव के पास वन विभाग ने पकड़ा, लेकिन पता चला कि वाहन पुलिस का है, तो वन अमला दुविधा में पड़ गया। वन व पुलिस अधिकारियों ने मामले को दबाने का षडयंत्र रच लिया, लेकिन इसी बीच शनिवार को अचानक से पुलिस वाहन की फोटो सोशल मीडिया पर आ गईं।

वाहन में रखे थे सागौन के 11 लठ्ठे

फोटो में स्पष्ट दिख रहा है कि उक्त वाहन पर जेल वाहन बंडा पुलिस लिखा है। सरकारी वाहन में 11 सागौन के बड़े-बड़े लठ्ठे रखे हैं। बताया जा रहा है कि बंडा पुलिस के एक अधिकारी अपनी ससुराल के लिए उक्त सागौन की तस्करी करवा रहे थे। मामला सामने आने के बाद वन विभाग और पुलिस की मिलीभगत सामने आ गई है।

जिम्मेदार बोले

लिखित शिकायत तो नहीं मिली है, लेकिन कुछ लोगों ने फोटो दिखाए हैं कि पुलिस वाहन से सागौन की तस्करी हो रही थी। पूछताछ की है और मामले की जांच के लिए बंडा एसडीओपी को जिम्मेदारी दी गई है। - डॉ. संजीव उइके, एएसपी।
पुलिस वाहन की वायरल हो रहीं फोटो कितनी पुरानी हैं, यह स्पष्ट नहीं है। न ही ऐसी को शिकायत हुई है। कई बार पुलिस और वन विभाग संयुक्त कार्रवाई करते हैं, हो सकता है कि ऐसी ही किसी कार्रवाई के दौरान की फोटो वायरल कर पुलिस को बदनाम किया जा रहा हो।

- उपमा सिंह, थाना प्रभारी, बंडा
यह मामला हमारे यहां का नहीं है, शाहगढ़ वन परिक्षेत्र का हो सकता है। वहां की रेंजर ही कुछ बता सकतीं हैं।

- विकास सेठ, रेंजर बंडा।
हम लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, इसलिए लोग हमारे पीछे पड़े हैं, हमने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की है।

- अंजू वर्मा, शाहगढ़ रेंजर।