
After showing off for a few days, the repair work of Khimlasa Fort stopped
बीना. उप काशी कहे जाने वाले खिमलासा में स्थित किला धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है, लेकिन पुरातत्व विभाग द्वारा इसकी देखरेख नहीं किए जाने के कारण किले का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। कुछ दिनों पहले खिमलासा किला की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया था, जो कुछ दिन की रस्म अदायगी करके बंद कर दिया गया है। इसके बाद काम आगे किया भी जाना है या नहीं इसकी कोई जानकारी नहीं है। किले के अंदर जाने के लिए प्राचीन पांच दरवाजे हैं, जो अपने अंदर इतिहास को समेटे हुए हैं, लेकिन धीरे-धीरे वह भी जर्जर होते जा रहे हैं। करीब तीन वर्ष पहले बसाहरी दरवाजे की दीवार जर्जर होने से ढह गई थी, लेकिन वहां पर मरम्मत नहीं कराई गई है। साथ ही पुरातत्व विभाग की नजर भी इसपर नहीं जा रही है। किले के अंदर स्थित नगीना महल के पीछे की दीवार भी जर्जर हो चुकी है, वह भी ढहने की कगार पर है। यहां से निकलने वाले लोगों को भी परेशानी होती है, क्योंकि किले के अंदर भी बड़ी संख्या में लोग रहते हैं, जिन्हें दीवार गिरने का डर बना रहता है। यदि मरम्मत का कार्य नहीं किया गया तो किला अपना अस्तित्व खो देगा।
अन्य जगह होते हैं महोत्सव
अन्य शहरों में स्थित किलों में सौंदर्यीकरण कार्य या महोत्सव आदि होते रहते हैं, जिससे किले की मरम्मत भी हो जाती है, लेकिन इस किला में जिम्मेदारों द्वारा भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है और न ही जनप्रतिनिधियों द्वारा इस धरोहर को बचाने के लिए कोई कार्य कराया गया है। किला में वीरों और कई गौरव गाथाओं के साथ हिन्दू-मुस्लिम एकता की भी निशानी है, जिसमें हनुमान जी के साथ अन्य देवी देवता विराजमान हैं, तो वहीं पंचपीर की दरगाह भी यहां स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए केवल एक चौकीदार रखा गया है, जो यहां पर सिर्फ लोगों को अंदर आने से रोकता है।
पर्यटक स्थल के रूप में किया जा सकता है विकसित
किला की मरम्मत कराके इसे लोगों को घूमने के लिए पर्यटन के लिए भी विकसित किया जा सकता है, जिससे इसका रखरखाव होने के साथ आय भी होगी, लेकिन इस ओर अभी तक पहल नहीं की गई है।
Published on:
21 Apr 2022 08:00 am
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