रीवा। महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव ह्वाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर की पहली सफेद बाघिन विंध्या की मौत हो गई है। वह करीब १५ वर्ष आठ माह की थी और कई दिनों से बीमार चल रही थी। सामान्य पूरी होने की वजह से कई महीने से उसके खानपान पर भी असर पड़ रहा था, जिसकी वजह से लगातार कमजोर होती जा रही थी। मौत के बाद निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार चिडिय़ाघर परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान राज्यमंत्री रामखेलावन पटेल, सांसद सतना गणेश सिंह, रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ला सहित बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। विंध्या बाघिन लोगों की भावनाओं से जुड़ी हुई थी। करीब चार दशक के अंतराल के बाद विंध्य में सफेद बाघों की वापसी विंध्या के रूप में हुई थी। उसे भोपाल के वनविहार से नवंबर २०१५ में मुकुंदपुर लाया गया था। तब से अब तक वह ह्वाइट टाइगर सफारी की प्रमुख आकर्षण रही है। पर्यटक उसे नजदीक से देख पाते थे इसलिए उसकी फोटो और वीडियो भी बड़ी संख्या में वायरल होती रही है। बीते करीब एक वर्ष से विंध्या कमजोर होने लगी थी, वह कई बार बैठ जाती थी तो घंटों बैठी रहती थी, केयर टेकरों द्वारा ही उठाया जाता था। ह्वाइट टाइगर सफारी में वह शुरू से ही छोड़ी गई थी और आखिरी समय तक वहीं रही। जबकि उसके साथ दूसरे सफेद बाघों की अदला-बदली की जाती रही है। कुछ समय के लिए बाड़े में रखा गया था लेकिन फिर उसे सफारी में छोड़ दिया गया था। दूसरे बाघ-बाघिन के साथ उसका झगड़ा नहीं होता था, इसलिए प्रबंधन ने लगातार उसे सफारी में रखने का निर्णय लिया था। ——-
उम्रदराज होने की वजह से नहीं दे पाई शावक
वर्ष २०१८ में विशेषज्ञों की देखरेख में सफेद बाघ रघु और विंध्या का मिलन कराया गया था। उम्मीद थी कि वह सफेद शावकों को जन्म देगी। उसकी उम्र ज्यादा होने की वजह से विशेषज्ञ भी इस पर कामयाब नहीं हुए।
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विंध्य के लिए गौरव हैं सफेद बाघ
सफेद बाघ विंध्य की पहचान का बड़ा प्रतीक है। सबसे पहले यहीं सीधी जिले के जंगल में रीवा रियासत के पूर्व महाराजा मार्तंड सिंह ने २७ मई १९५१ को शिकार के दौरान सफेद शावक पकड़वाया था। उसे गोविंदगढ़(रीवा) में किला परिसर में ही रखा गया था। उस बाघ का नाम मोहन रखा गया था। वहीं पर कई बाघिन के साथ संसर्ग के बाद सफेद शावकों के जन्म हुए और देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही कई देशों को भी सौंपे गए थे। कहा जाता है कि वर्तमान में जहां भी सफेद बाघ हैं, वह रीवा से भेजे गए बाघों के ही वंशज हैं। इसलिए सफेद बाघ इस अंचल के लिए गौरव का प्रतीक माना जाता है। क्षेत्र से उठी मांग के चलते ही सरकार ने सतना जिले के मुकुंदपुर में ह्वाइट टाइगर सफारी बनाई। यह दुनिया की इकलौती ह्वाइट टाइगर सफारी है।
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