
Rewa Green belt aria beehar bichhiya river
रीवा। शहर की नदियों और प्रमुख नालों के ग्रीन बेल्ट एरिया में अतिक्रमण लंबे समय से चल रहा है। धीरे-धीरे ग्रीन बेल्ट समाप्त होता जा रहा है। इसको लेकर लगातार शिकायतें नगर निगम आयुक्त एवं अन्य अधिकारियों के पास तक पहुंच रही हैं। इस अतिक्रमण की वजह से इन जल स्त्रोतों के किनारे रहने वाले लोगों को बरसात के दिनों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त मृणाल मीना ने शहर के कुछ हिस्सों का भ्रमण कर वस्तु स्थिति को देखा। इसके बाद अधीक्षण यंत्री एवं सभी जोन के प्रभारियों से कहा है कि वह नदियों और नालों के किनारे स्थित ग्रीन बेल्ट एरिया के अतिक्रमण को चिन्हित करें। इसके लिए वार्डवार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर पूरा अतिक्रमण चिन्हित करने के लिए कहा है।
शहर में कई प्रमुख नाले अतिक्रमण की वजह से नालियों के रूप में परिवर्तित हो गए हैं। इस कारण अब अतिक्रमण को चिन्हित करने के लिए पहले सर्वे कराया जाएगा इसके बाद बड़ी कार्ययोजना तैयार कर उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इस कारण पहले वार्डवार सर्वे कर यह रिपोर्ट मंगाई जा रही है ताकि रूपरेखा बनाई जा सके। ग्रीन बेल्ट में बड़ी संख्या में मकान बन चुके हैं, इन पर बड़ा एक्शन प्रशासन के लिए चुनौती भरा होगा। चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई किस तरह से होगी इसके लिए बाद में रूपरेखा तय होगी।
- शासन द्वारा भी जानकारी मांगी गई है
कुछ समय पहले ही नगर निगम से शासन ने भी ग्रीन बेल्ट के स्टेटस से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है। इस कारण नगर निगम ने इसका सर्वे शुरू कराने के लिए आदेश जारी किया है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद शासन को जानकारी भेजी जाएगी। जिसमें यह भी बताया जाएगा कि किस तरह से इस अतिक्रमण को क्रमबद्ध तरीके से खाली कराया जाएगा। ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करने संबंधी निर्देश पहले भी जारी होते रहे हैं।
- नदियों का ग्रीन बेल्ट 50 मीटर का है
शहर की दोनों प्रमुख नदियों बीहर और बिछिया के किनारे अतिक्रमण तेजी से बढ़ा है। जबकि इनका ग्रीन बेल्ट 50 मीटर दोनों ओर निर्धारित किया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण नहीं होने देने संबंधी आदेश जारी होते रहे हैं। शहर की दोनों नदियों के किनारे का पूरा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में आ गया है। वहीं नालों का ग्रीन बेल्ट नौ मीटर से अधिक चौड़ा है। अमहिया, झिरिया, समान आदि क्षेत्रों में ग्रीन बेल्ट की चौड़ाई गई जगह इससे अधिक है। हर जगह अतिक्रमण हो गया है। मास्टर प्लान में भी हर बार सुझाव दिए जाते हैं कि ग्रीन बेल्ट में पौधरोपण किए जाएं, किसी भी तरह का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा लेकिन इसका पालन रीवा शहर में नहीं हो पा रहा है।
- बाढ़ के समय चिन्हित हुआ था अतिक्रमण, कार्रवाई नहीं
शहर में वर्ष 2016 में बाढ़ आई थी। जिससे नदियों और नालों के किनारे रहने वाले लोग ही सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। लोगों का इस बाढ़ की वजह से भारी नुकसान हुआ था। जिसके बाद प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए नदियों के किनारे बाढ़ एरिया को चिन्हित करते हुए लाल रंग का निशान लगाया था। साथ ही ग्रीन बेल्ट एरिया को भी चिन्हित किया गया था। वहीं अमहिया नाले के कुछ हिस्से में कार्रवाई भी की गई थी। जिसमें कई मकान तोड़े भी गए थे। निगम ने इस क्षेत्र को खाली नहीं कराया जिससे फिर लोगों ने कब्जा जमा लिया और मकान पहले की तरह ही बनकर फिर से तैयार हो गए हैं।
- एनजीटी ने भी कार्रवाई का दिया था निर्देश, कई याचिकाएं लंबित
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में शहर के शारदापुरम मोहल्ले के निवासी अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा की एक याचिका पर एनजीटी ने कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश जारी किया था। जिसमें प्रदेश के मुख्य सचिव को इसकी निगरानी करने का दायित्व सौंपते हुए कहा था कि नदियों के किनारे जो अतिक्रमण किया जा रहा है, उस पर तत्काल रोक लगाई जाए और मास्टर प्लान की शर्तों के अनुरूप कार्रवाई का निर्देश दिया गया था। जिसके परिपालन में कलेक्टर और नगर निगम को कार्रवाई करना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शहर के ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण को लेकर कई याचिकाएं अब भी लंबित हैं जिन पर फैसले आना शेष है। निगम आयुक्त ने भी नए सिरे से सर्वे कराने के आदेश में इस बात का उल्लेख किया है कि लंबित याचिकाओं पर जानकारी शासन को भेजना है।
- अतिक्रमण की वजह से प्रदूषण भी बढ़ा
जिस तेजी के साथ ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण बढ़ा उसी गति से जल स्त्रोतों में प्रदूषण भी बढ़ा है। किनारे तक बने मकानों से निकलने वाला कचरा और सीवर नदी-नालों में प्रदूषण तेजी से बढ़ा रहा है। पूर्व में एनजीटी में लगाई गई याचिका में इस बात का उल्लेख किया गया था, जिस पर एनजीटी ने निर्देशित किया था कि बीहर और बिछिया नदियों में रीवा शहर का जो दूषित पानी नालों के माध्यम से मिल रहा है उस पर तत्काल रोक लगाई जाए। सीवरेज प्रोजेक्ट को भी जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया गया था। इसके लिए नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देशित किया गया था कि वह नदियों के प्रदूषण को रोकने एक्शन लें।
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शहर में नदी-नालों के किनारे निर्धारित ग्रीन बेल्ट में निर्माण प्रतिबंधित है। कुछ जगह अतिक्रमण की जानकारी सामने आई है। लगातार इस पर कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। इसलिए ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण का सर्वे करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट आने के बाद अगली कार्रवाई की रूपरेखा तय होगी।
मृणाल मीना, आयुक्त नगर निगम
Published on:
16 Dec 2022 03:51 pm
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