15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लॉकडाउन से चिड़ियाघर के जानवरों के लिए भी आहार का बढऩे लगा संकट

सतना के मांस सप्लायर की सूचना पर चिडिय़ाघर प्रबंधन ने कलेक्टर को लिखा पत्र, लॉकडाउन की वजह से बकरे और पाड़े नहीं मिल रहे, हर दिन सवा क्विंटल मांस की होती है जरूरत

2 min read
Google source verification
Ludhiana zoo

Ludhiana zoo

रीवा. महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव चिडिय़ाघर मुकुंदपुर में भी कोरोना वायरस के संक्रमण के डर से किए गए लॉकडाउन का असर दिखने लगा है। चिडिय़ाघर एवं ह्वाइट टाइगर सफारी को पिछले सप्ताह ही आम दर्शकों के लिए बंद कर दिया गया था। अब यहां पर रह रहे जानवरों के भोजन व्यवस्था पर भी असर दिखने लगा है। चिडिय़ाघर और सफारी के जानवरों का भोजन सतना से आता है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में पुलिस ने चिडिय़ाघर आने वाले वाहनों को भी रोका था। हालांकि कलेक्टर और एपी के हस्तक्षेप की वजह से वाहनों को आने की अनुमति दी गई है। अब एक और नई समस्या उत्पन्न होने जा रही है। बाघों के लिए हर दिन मांस की सप्लाई की जाती है। इन्हें ताजा मांस सतना से मुकुंदपुर भेजा जाता है। मांस सप्लायर के पास भी अब बकरे और पाड़े की कमी महसूस होने लगी है। जहां से वह मंगाता था, वहां पर लॉकडाउन की वजह से सब कुछ बंद है। आने वाले तीन-चार दिनों के भीतर यदि बाघों के लिए बकरे, मुर्गे और पाड़े की व्यवस्था नहीं की गई तो सप्लाई मुश्किल हो जाएगी। चिडिय़ाघर में दर्जनभर की संख्या में शेर, बाघ, तेंदुआ आदि हैं। इनके लिए हर दिन १२० से १३० किलो मांस की आवश्यकता होती है।

चिडिय़ाघर प्रबंधन ने कलेक्टर को लिखा पत्र
बाघों के लिए मांस की सप्लाई को लेकर आ रही समस्या से चिडिय़ाघर प्रबंधन ने कलेक्टर को अवगत कराया है। जिसमें कहा गया है कि सतना में सप्लायर के पास तक मांस की व्यवस्था हो सके ऐसे इंतजाम में छूट दी जाए। सेंट्रल जू अथारिटी ऑफ इंडिया की गाइडलाइन में बाघों की देखरेख से जुड़ी हर सामग्री को अत्यावश्यक सेवा में माना गया है। सतना कलेक्टर ने पहले भी कहा था कि चिडिय़ाघर की जो भी जरूरतें होंगी उनमें कोई रोकटोक नहीं रहेगी।

तापमान की वजह से आहार में परिवर्तन नहीं
सामान्य तौर पर तापमान अधिक बढऩे पर बाघों के आहार में परिवर्तन किया जाता है। गर्मी के चलते वह खाना कम खाते हैं, जो दिया जाता है उसे भी छोड़ देते हैं। अभी प्रति बाघ के हिसाब से १२ किलो मांस दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि करीब ४० डिग्री तक पारा पहुंचने पर इसे घटाया जाएगा। वर्तमान में मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है, कुछ दिन तापमान बढऩे के बाद बारिश हो रही है और फिर से ठंड का मौसम आ जाता है।

आने वाले दिनों में मांस की सप्लाई में कठिनाई हो सकती
संजय रायखेड़े, संचालक चिडिय़ाघर मुकुंदपुर ने बताया कि लॉक डाउन के चलते आम दर्शकों के लिए चिडिय़ाघर और सफारी पहले से ही बंद है। अभी कोई समस्या नहीं है लेकिन आने वाले दिनों में मांस की सप्लाई में कठिनाई हो सकती है। इस संबंध में कलेक्टर से मांग की गई है कि व्यवस्था की अनुमति दें।