जयपुर. बीते कुछ दिनों से बीमार चल रहे राष्ट्रसंत मुनि तरुण सागर का शनिवार तड़के सुबह ३ बजे के करीब 51 साल की उम्र में निधन हो गया। मुनि बीते कुछ दिनों से पीलिया से पीडि़त थे, जिसकी वजह से उनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था और उन्होंने दिल्ली के शाहदरा के कृष्णानगर में अंतिम सांस ली। अपने प्रवचनों में अंधविश्वासों, मान्यताओं और गलत अभ्यासों की आलोचना मुनि ने की। शहर में चातुर्मास कर रहे जैन मुनियों और आर्यिकाओं ने मुनि के प्रति संवेदना व्यक्त की। मानसरोवर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में आर्यिका विज्ञा श्री, जनकपुरी स्थित मंदिर में आर्यिका गौरवमति सहित अन्य साधु संतों ने कहा कि मुनि तरुण सागर जैन संत के साथ-साथ जन संत थे। उन्होंने अपने कड़वें प्रवचनों के जरिए देश और दुनिया को वह कड़वी औषधि दी है जिसकी प्रत्येक प्राणी को जरूरत थी। शास्त्रीनगर के कावंटिया सर्किल स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि विभंजन सागर, बरकत नगर स्थित जैन मंदिर में मुनि निर्मोह सागर, गायत्री नगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में गणिनी आर्यिका विमलप्रभा के सानिध्य में भक्तों ने णमोकार मंत्र के जाप किए।
आतंकवाद का मुद्दा रहा चर्चा में
मुनि ने जयपुर प्रवास के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर कहा था कि जितने आतंकवादी पाकिस्तान में नहीं हैं, उससे ज्यादा गद्दार हमारे देश में है। मुनि ने आरक्षण पर भी अपनी राय बेबाकी से रखी और कहा कि देश में योग्यता और पात्रता के आधार पर ही आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
राजकीय अतिथि के सम्मान से नवाजा
मुनि का 6 फरवरी 2002 को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा मिला। इसके बाद 2 मार्च 2003 को गुजरात सरकार ने भी उन्हें राजकीय अतिथि के सम्मान से नवाजा