14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Holi 2025: यहां भक्तों संग देवता खेलते हैं होली, इस मंदिर में केसर के रंग से रंगे जाएंगे भगवान

Holi 2025: होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, पूरे देश में इनको लेकर उत्साह रहता है। ब्रज मंडल में होली उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। यहां होली की शुरुआत बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है। लेकिन आज हम देश के उन मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां भक्तों संग देवी देवता होली खेलते हैं। इन्हीं में से एक है बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple Mathura) और काशी विश्वनाथ मंदिर।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Pravin Pandey

Feb 24, 2023

holi 2025 puja

holi 2025 puja: होली 2025 पूजा

Holi 2025: ब्रजमंडल की होली में शामिल होने के लिए देश विदेश से श्रद्धालु जुटते हैं। मथुरा के वृंदावन क्षेत्र में स्थित बांके बिहारी मंदिर में होली का पर्व धूम धाम से मनाया जाता है। बांके बिहारी मंदिर में रंगभरी एकादशी के दिन होली धूमधाम से मनाई जाती है। इसको लेकर तीन मार्च को यहां आयोजन होगा।


बांके बिहारी मंदिर में रंगभरी एकादशी (फाल्गुन शुक्ल एकादशी) के दिन शुद्ध केसर से बनाए रंग से बांके बिहारी को रंगा जाएगा। इसके बाद से यहां परंपरागत होली की शुरुआत होगी। इसके बाद मंदिर परिसर में टेसू के रंगों के साथ-साथ चौव्वा, चंदन, अबीर और गुलाल से होली खेली जाएगी।

ये भी पढ़ेंः Holika Dahan: होलिका दहन पर भद्रा का साया, जानें कब जलेगी होली, किस दिन मनेगा रंगोत्सव धुलंडी

बता दें कि बसंत पंचमी से ही मथुरा के मंदिरों में ठाकुरजी को गुलाल भेंट किया जाता है। इस गुलाल को प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं पर उड़ाया भी जाता है। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव, गोवर्धन, राधाकुंड, गोकुल, महावन, बलदेव आदि तीर्थस्थलों पर होली का पर्व बसंत पंचमी से शुरू होकर फाल्गुन पूर्णिमा के अगले दिन तक सेलिब्रेट किया जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर में भी होली (Holi Kashi Vishwanath Temple)

वाराणसी में रंग भरी एकादशी के दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा होती है। इसमें भगवान शिव और मां पार्वती को गुलाल लगया जाता है। रंगों की होली खेली जाती है। काशी के राजा कहे जाने वाले बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती की इस दिन पालकी निकाली जाती है।

मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव माता पार्वती और गणों के साथ होली खेलते हैं। इस दिन बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार किया जाता है, उन्हें दूल्हे के रूप में सजाया जाता है। इस दिन शिव पार्वती का गौना कराया जाता है।

ये भी पढ़ेंः Holika Dahan: ये हैं होलिका दहन के नियम, पूजा सामग्री और आसान मंत्र

रंगभरी एकादशी का महत्व

मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन ही विवाह के बाद भगवान शिव, माता पार्वती के साथ पहली बार काशी आए थे। यहां भक्तों ने शिव पार्वती का स्वागत गुलाल से किया था। इसी से इस दिन शिव पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन काशी में भगवान शिव की बारात भी निकाली जाती है।