
suthaliya sichai pariyojna Map
गुना, राजगढ़ और विदिशा की सीमा से लगे गांवों की जमीन सिंचित हो, इसके लिए प्रदेश की कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने 2018 में 1375 करोड़ की सुठालिया परियोजना ( suthaliya irrigation) स्वीकृत की। इसका निर्माण 2024 तक होना है। राजगढ़ जिले के ब्यावरा (Biaora) विकासखंड में ग्राम बैराड़ के पास पार्वती नदी पर प्रस्तावित है। इसमें राजगढ़ जिले के 5 और गुना जिले के 2 ग्राम डूब में आ रहे हैं। डेढ़ हजार से अधिक परिवारों को विस्थापित किया जाएगा। यहां की 3400 हेक्टेयर जमीन डूब रही है। सुठालिया परियोजना में भी जिस दर पर जमीन का मुआवजा दिया जा रहा है, वह बाजार दर से बहुत कम है। सुठालिया परियोजना में डूब में आ रही ज्यादातर जमीन पूर्व से सिंचित है। इन जमीनों का कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से बहुत कम मुआवजा है। किसान उचित मुआवजा मिलने पर ही विस्थापित होने को तैयार हो सकते हैं। बीते दो वर्ष से 850 परिवारों का पलायन रोकने का ग्रामीण विरोध करते रहे हैं। इससे हजारों हैक्टेयर भूमि सिंचित करने की योजना है उसी बांध में 4300 हैक्टेयर जमीन भी जा रही है। इससे हजारों हैक्टेयर उपजाऊ जमीन भी बंजर हो जाएगी। कई किसान बेघर और बेजमीन के हो जाएंगे। साथ ही जो बेशकीमती जमीनें किसानों की जा रही है उनकी दरें भी नाम मात्र की शासन ने तय की है, इसीलिए इसका विरोध किया जा रहा है। वे सर्वे कैंप में कम मुआवजे को लेकर विरोध कर चुके हैं।
परियोजना एक नजर में
- 1375 करोड़ की लागत से बनेगा डेम।
427 मीटर पूर्ण भराव और 25 मीटर ऊंचाई वाले बैराड़ बांध
- 220 गांवों की जमीन में होगी सिंचाई ।
- 49800 हेक्टयर भूमि होगी सिचित।
- 4300 हेक्टयर जमीन पर होगा जलभराव।
- डूब में 850 परिवार होंगे विस्थापित।
- 2024 तक निर्माण करने का है लक्ष्य।
धारा-19 का हो चुका है प्रकाशन
तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 2018 में सुठालिया परियोजना की मुख्य बांध के लिए घोषणा की, इसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति 4 अक्टूबर 2018 को हुई। इसका ठेका एचईएस सुठालिया और जेबी हैदराबाद पटेल कंपनी मुंबई को संयुक्त रूप से मिला। इसके लिए यह अनुबंध हुआ था कि सुठालिया बांध 2024 में संबंधित कंपनी को बनाकर देना होगा।डैम का काम शुरू हो इसके लिए 190 करोड़ रुपए राजगढ़ कलेक्टर के पीडी खाते में जमा कराए। राजगढ़ जिले के गुर्जरखेड़ी कला और गुर्जरखेड़ी खुर्द और गुना जिले के 3 गांव रघुनाथपुरा, तेजाखेड़ी, कादीखेड़ा पूरी तरह डूब जाएंगे। इनके अलावा 13 गांव की जमीन मकान आदि को लेकर धारा-19 का प्रकाशन किया जा चुका है। एक-एक कर इस परियोजना में शामिल 41 गांव जो आंशिक या पूरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। सभी का प्रकाशन किया जाना शेष है। राजगढ़ कलेक्टर ने सुठालिया में बैराड़ बांध के लिए राजगढ़ जिले के 13 गांव में से मऊ में बांध और बैराड़ में डूब संबंधित दो प्रकरण धारा 19 के तहत कलेक्टर ने आगे बढ़ा दिए हैं और 1 नवंबर के गजट में दोनों गांव के प्रभावित होने वाले किसानों के रकबा को प्रकाशित किया गया है। अब धारा 21 में किसानों को नोटिस देकर दावे आपत्ति के बाद भू अर्जन और अवार्ड की प्रक्रिया होगी। राजगढ़ के अभी भी 12 प्रकरण शेष हैं। गुना जिले के पांच और भोपाल के 8 में से एक भी प्रकरण पर काम नहीं हुआ है। परियोजना की परिधि के लिए राजगढ़ में पटवारी और राजस्व कर्मचारियों ने मुड्डी लगाने का काम शुरू कर दिया है।
राजगढ़ जिला
राजगढ़ जिले के पांच गांव गुर्जरखेड़ी खुर्द, गुर्जरखेड़ी कलां, कादीखेड़ा, रुगनाथपुरा और तेजाखेड़ी डूब में आ रहे हैं। खास बात यह है कि इस जमीन में से अधिकतर उपजाऊ है और कुछ हिस्से में जंगल है। अब जितनी जमीन में बाध बनाया जा रहा है वहां की जमीन पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी। बदले में किसानों वैकल्पिक अन्य जगह सिर्फ रहने को मिल रही और मुआवजा के तौर पर नाम मात्र की राशि। ऐसे में कैसे वे अपना आगे का जीवन निर्वाह करेंगे, यह बड़ी चुनौती है। करीब 850 परिवारों को विस्थापित करने की योजना है, वे ही इस बात का विरोध जता रहे हैं कि हमें आज की रेट में मुआवजा दिलाया जाए। ब्यावरा, सुठालिया के 183 और नरसिंहगढ़ के 37 कुल 220 गांवों के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।
गुना के पांच गांव और 700 बीघा सिंचित जमीन होगी प्रभावित
मधुसूदनगढ़ के सुठालिया बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांव के लोगों ने बताया कि गुर्जर खेड़ी कला तेजाखेड़ी, रूगनाथपुरा, निवारा और खुर्द के साथ रघुनाथपुरा गुना के आसपास गांव पूरी तरह डूब जाएंगे, 11 गांव ज्यादा प्रभावित होंगे, गुना जिले में 5गांव और बढऩे की संभावना है। इस बांध के बनने से 82 लाख हेक्टेयर जमीन डूब में जाएगी और 850 परिवारों का पलायन यहां से होने की बात ग्रामीण स्वीकारते हैं। 19 हेक्टर जमीन मऊ में नापी है, जहां कांकरिया गांव के लोगो को विस्थापित करने की योजना है।
जितने में एक बीघा न आए उतने में खरीद रहे चार बीघा
जिस दर में शासन उक्त परियोजना में जमीनें ले रहा है उसमें आज के समय में जमीन नहीं खरीद सकते। एक लाख रुपए प्रति बीघा शासन देने को इच्छुक है जबकि आज से चार साल पहले मोहनपुरा जैसी बड़ी परियोजना में भी ढाई लाख प्रति बीघा का मुआवजा दिया गया था। इसमें महज एक लाख दिए गए जो कि बेहद कम है। कांग्रेस की मांग है कि 15 लाख रुपए प्रति हैक्टेयर दिया जाए, यानि पौने चार लाख रुपए प्रति बीघा। इसी को लेकर विरोध है।
क्या है मुआवजे का गणित
पार्वती नदी से लगी जमीनें पहले से सिंचित हैं। यहां डूब क्षेत्र में आने वाली जमीनों का मुआवजा 6 लाख रुपए प्रति हैक्टेयर दे रहे हैं जबकि यहां की जमीन 5 से 6 लाख बीघा में यूं ही बिक रही। 20 लाख रुपए हैक्टेयर में जमीन आमतौर पर लोग खरीद रहे हैं। ऐसे में किसानों की मांग है कम से कम 30 से 35 लाख रुपए हैक्टेयर जब तक उन्हें मुआवजा नहीं देते तब तक वे जमीनें नहीं छोड़ेंगे। बता दें कि जिले में ही बनाई गई मोहनपुरा और कुंडालिया जैसी सिंचाई परियोजनाओं को विशेष पैकेज में लिया गया था। जिसके कारण यहां की जमीनों का अधिक मुआवजा दिया गया था। विस्थापन को लेकर भी यहां कोई भी व्यक्ति हो उसे अलग से पांच लाख, मकान के प्रति कमरे के हिसाब से भुगतान किया गया। जबकि सिंचित असिंचित जमीनों के लिए भी भरपूर मुआवजा दिया गया। लेकिन सुठालिया में मुआवजे को लेकर विभाग हाथ दबाए हुए हैं।
दिग्विजय सिंह ने लिखा था यह पत्र
18 दिसंबर 2021 को राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने टेम सिंचाई परियोजना व सुठालिया सिंचाई परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा। भोपाल, विदिशा, राजगढ़ व गुना जिले के डूब क्षेत्र में आने वाले प्रभावितों को विस्थापन से पूर्व 15 लाख रुपए हेक्टेयर की दर से मुआवजा राशि देने व शहरी क्षेत्र में बसने के लिए भूखंड दिए जाने की नीति बनाने की बात कही। तत्समय दिग्विजय सिंह ने बताया कि मैंने गत दिवस भोपाल के पास टेम नदी पर बन रही टेम परियोजना और राजगढ़ जिले में पार्वती नदी पर बन रही सुठालिया परियोजना के डूब क्षेत्र का दौरा किया था और डूब में आ रहे परिवारों से चर्चा की। राज्य शासन द्वारा दिए जा रहे बहुत कम मुआवजे से लेकर स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है।दिग्विजय सिंह ने कहा कि टेम सिंचाई परियोजना और सुठालिया सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावित गांवों के किसानों के विस्थापन से पूर्व 15 लाख रुपए हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाए तथा शहरी क्षेत्र में बसने के लिए भूखंड दिए जाने की नीति बनाई जाए। दिग्विजय सिंह ने मांग की है कि 2021 में बढ़ी हुई मंहगाई और जमीन की कीमतों को देखते हुए उन्हें 15 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा और समीपवर्ती शहरी क्षेत्र में रहवासी भूखंड उपलब्ध कराए जाएं।तभी विस्थापितों को उजडऩे का दर्द कम हो सकेगा और वे परियोजना से लाभांवित होने वाले किसानों के हित में विस्थापन के लिए रजामंदी दे सकेंगे।
काफी कम दिया जा रहा है मुआवजा
हमारी गलत मांग नहीं है, सरकार जिस हिसाब से किसानों को मुआवजा दे रही है वह गलत है। मोहनपुरा और कुंडालिया डैम के समय जो मुआवजा दिया गया था उससे भी अब कम दिया जा रहा है, इसे चार साल हो चुके हैं। पार्वती से लगी जमीनों की कीमतें अधिक है, उसके बावजूद भी कम मुआवजा दिया जा रहा है। मुआवजा भरपूर नहीं मिलेगा तो हम नहीं मानेंगे।
- विजय बहादुर सिंह, टोड़ी
अब तक सिंचाई परियोजना को लेकर धारा-19 का प्रकाशन हो चुका है। जिसमें पांच गांव पूरी तरीके से डूब में आ रहे हैं। परियोजना के निर्माण के बाद इसमें 220 गांव लाभंावित होंगे। मुआवजा संबंधी निर्णय वरिष्ठ कार्यालय से ही लिए जाएंगे।
- जे. के. ठाकुर, ईई, पार्वती सिंचाई परियोजना
Published on:
22 Jan 2022 01:58 am
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