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उल्टी, दस्त के साथ डेंगू-मलेरिया भी हावी, ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा प्रभावित

बीते दिनों हुई बारिश से नगरों और गांवों में जगह-जगह जलभराव हुआ है, इस वजह से वहां बेतहाशा मच्छर पनप रहे हैं

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बीते दिनों हुई बारिश से नगरों और गांवों में जगह-जगह जलभराव हुआ है, इस वजह से वहां बेतहाशा मच्छर पनप रहे हैं

उल्टी, दस्त के साथ डेंगू-मलेरिया भी हावी, ग्रामीण क्षेत्र ज्यादा प्रभावित

रायसेन. जिले में उल्टी दस्त के साथ अब डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारी भी पैर रसारने लगी है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी बीमारियां तेजी से असर दिखा रही हैं। जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में बड़ी संख्या ग्रामीणों की होती है, जिनमें उल्टी-दस्त के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। बीते दिनों हुई बारिश से नगरों और गांवों में जगह-जगह जलभराव हुआ है, जिससे प्रदूषण के साथ मच्छर पनप रहे हैं। दूषित पानी पीने से लोग उल्टी दस्त का शिकार हो रहे हैं। नदी तालाबों के साथ भूमिगत पानी भी दूषित हो गया है।

जो बीमारियों का कारण बन रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी प्रियंवदा गुप्ता से मिली जानकारी के अनुसार जिले में डेंगू के 09 मरीज पाए गए हैं, जबकि मलेरिया के 06 मरीज हैं। यह आंकड़े वो हैं जो मलेरिया विभाग की जांच में सामने आए हैं, जबकि असलियत में इन मरीजों की संख्या कई गुना अधिक है। ग्रामीण स्थानीय स्तर पर निजी क्लीनिकों में इलाज कराते हैं, जिनकी बीमारियों की सही जांच नहीं हो पाती है। जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. एमएल अहिरवार के अनुसार हर दिन बड़ी संख्या में उल्टी-दस्त के मरीज आ रहे हैं। इसका कारण दूषित पानी ही है।

ऐसे समझें मलेरिया और डेंगू को
मलेरिया की शुरुआत सामान्य बुखार के साथ होती है। एक दो दिन में बुखार तेज होता है और ठंड लगती है। साथ ही तेज सिर दर्द, उल्टी, चक्कर आना तथा थकान महसूस होना शुरू होता है। यदि आपके साथ ऐसा कुछ हो रहा है तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर जांच कराएं। ये मलेरिया हो सकता है, जिसे नजर अंदाज करना खतरनाक होगा। इसी तरह डेंगू की शुरुआत तेज सिर दर्द और जी मचलाने से होती है। फिर बुखार आना शुरू होता है, उल्टी के साथ आंखों के पीछे दर्द, मांशपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है। यह डेंगू के लक्षण हैं, ऐसा है तो तुरंत जांच कराना जरूरी है।

ये रखें सावधानियां
अपने घर या आस-पास पानी का भराव नहीं होने दें, जहां पानी भरा है उसे या तो खाली करें या उसमें केरोसिन का छिड़काव करें। मच्छरदानी लगाकर सोएं। नीम के पत्तों का धुआं करें। उपरोक्त में से कोई भी लक्षण हैं तो तुरंत अस्पताल पहुंचकर खून की जांच कराएं और जरूरी दवाएं लें।
लापरवाही न करें, अस्पताल में जांच कराएं
डॉ. अहिरवार का कहना है कि दो या तीन दिन से ज्यादा बुखार आने पर लापरवाही नहीं करें, तुरंत अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं, ताकि बीमारी का सही इलाज हो सके। जरा सी लापरवाही गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है, इससे जान पर खतरा बन आता है।