
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी का भव्य मंदिर स्थित है। डोंगरगढ़ में 16 सौ फीट ऊंची पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी का प्रसिद्ध मंदिर है।

महासमुन्द से 40 किमी दक्षिण की ओर विकासखण्ड बागबाहरा में घुंचापाली गांव स्थित है। जहां पर चंडी देवी की प्राकृतिक महा प्रतिमा विराजमान है। यहां प्रतिवर्ष चैत्र एवं क्वांर मास के नवरात्र में मेला लगता है, एवं बड़ी संख्या में भक्त ज्योत प्रज्वलित करने तथा दर्शन के लिये आते हैं।

राजधानी रायपुर में सिद्धपीठ महामाया मंदिर. ऐसा माना जाता है कि 1400 साल पहले इस मंदिर का निर्माण हैहयवंशी राजाओं ने करवाया था।

महासमुन्द से 25 किमी दक्षिण की ओर खल्लारी गांव की पहाड़ी के शीर्ष पर खल्लारी माता का मंदिर स्थित है। प्रतिवर्ष क्वांर एवं चैत्र नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ इस दुर्गम पहाड़ी में दर्शन के लिये आती है।

डोंगरगढ़ से 20 किलोमीटर दूरी पर करेला स्थित मां भवानी का मंदिर प्राकृतिक छटाओं से हरा-भरा हो गया है। पहाड़ों की हरियाली के बीच स्थित इस मंदिर के लिए पर्यटक आकर्षित हो रहे हैं। मंदिर में निर्माण कार्य भी जारी है।

बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित देवी दुर्गा, महालक्ष्मी को समर्पित एक मंदिर है और पूरे भारत में फैले ५२ शक्ति पीठों में से एक है, जो दिव्य स्त्री शक्ति के मंदिर हैं।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में घने जंगलों और पहाड़ों के बीच एक अनोखा धार्मिक स्थल है जिसका नाम सियादेवी मंदिर है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है बल्कि इसके पीछे की पौराणिक कथा भी इसे विशेष बनाती है।