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नागपुर-बिलासपुर मिनी बुलेट ट्रेन के लिए यात्रियों को करना होगा लंबा इंतजार, इस साल तक पटरी पर आने की संभावना

नागपुर से बिलासपुर के बीच जब तक लगभग आठ से नौ करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम नहीं होगा, तब तक पटरी पर हाईस्पीड ट्रेन नहीं उतरेगी

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नागपुर-बिलासपुर मिनी बुलेट ट्रेन के लिए यात्रियों को करना होगा लंबा इंतजार, इस साल तक पटरी पर आने की संभावना

रायपुर. रेलवे अभी जिस तरह ताबड़-तोड हर सेक्शन में ब्लाक ले रहा है, वह हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए बल्कि सामान्य स्पीड वाली गाडि़यों के लिहाज से ही पटरी को दुरुस्त किया जा रहा है। नागपुर से बिलासपुर के बीच जब तक लगभग आठ से नौ करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम नहीं होगा, तब तक पटरी पर हाईस्पीड ट्रेन नहीं उतरेगी। इसके लिए बिलासपुर जोन के यात्रियों को वर्ष 2022 तक इंतजार करना पड़ेगा।

हमारे रेलवे जोन को हाईस्पीड ट्रेन 2013-14 के भारतीय रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने दी थी। इस ट्रेन को चलाने का प्रोजेक्ट आठ से नौ सौ करोड रुपए का है। अभी तक मामूली ही काम हो सका है। उरकुरा से दाधापारा, दुर्ग-डोंगरगढ़, राजनांदगांव, इतवारी और नागपुर सेक्शन में जो लगातार ब्लाक लिया गया, उससे केवल सामान्य स्पीड वाली गाडि़यों के परिचालन के ही लायक है। रेल अफसरों का कहना है कि हाईस्पीड ट्रेन के लिए लंबे अर्से तक इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि पहले फेस में रेलवे जोन के रेल मंडल स्तर पर पटरी के दोनों तरफ केवल फेंसिंग का ही कार्य कराया जा रहा है। हाईस्पीड ट्रेन मिलने के बाद जो भी बजट आया, उससे केवल यही काम कराया जा रहा है।

आठ से नौ सौ करोड़ वाले इस प्रोजेक्ट में से रायपुर रेल मंडल को हाईस्पीड के लिए 16.5 करोड़ रुपए मिला । इस राशि से पटरी के दोनों तरफ फेंसिंग और सेफ्टी पर खर्च करने का दावा किया जा रहा है। रायपुर रेल मंडल के दायरे में दुर्ग से दाधापारा की दूरी 80 किमी है, जिसमें से अभी तक केवल 19 किमी तक ही तार से घेरने का काम कराने की बात कही जा रही है।

बिलासपुर रेल डिवीजन दाधापारा सेक्शन तक तथा नागपुर रेल मंडल दुर्ग सेक्शन तक हाईस्पीड ट्रेन चलाने के लिए पटरी का काम कराएगा। क्योंकि हाईस्पीड ट्रेन 160 के स्पीड में नागपुर से बिलासपुर के बीच चलनी है। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने बिलासपुर जोन के तीनों रेल मंडलों की जिम्मेदारी तय की है।

रेलवे के आला अफसर कहते हैं कि 2019 के लोकसभाा चुनाव तक हाईस्पीड ट्रेन चलाना संभव ही नहीं है। क्योंकि अभी कोई भी इस तरह का ठोस काम हुआ ही नहीं। न तो ट्रैक उस लायक दुरुस्त किए जा सके न ही घुमावदार कार्ब को सीधा किया जा सका। एेसी स्थिति में अभी कम से कम तीन से चार साल से अधिक समय लगेगा।

रायपुर रेल मंडल की 61 किमी लंबी रेल लाइन के दोनों तरफ सेफ्टी का कार्य अधूरा है। यह काम हो जाने के बाद हाईस्पीड ट्रेन के लायक पटरी के कलपुर्जे बदलने से लेकर सिंगनल प्रणाली को दुरुस्त करने जैसे कार्य होंगे। अभी इस दिशा में कोई ठोस काम शुरू ही नहीं हुआ।

बिलासपुर रेलवे जोन के सीपीआरओ संतोष कुमार ने कहा कि हाईस्पीड ट्रेन चलाने की दिशा में काफी समय लगेगा। यह प्रोजेक्टर लगभग 8 से 9 सौ करोड़ रुपए का है। अभी तक कोई ठोस काम तीनों रेल मंडलों में से किसी में नहीं हुआ। चार साल बाद ही हाईस्पीड ट्रेन पटरी पर उतरने की उम्मीद की जा सकती है।