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CG News: प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई महंगी, एमडी-एमएस की सीटें 32 लाख रुपए

CG News: एमबीबीएस में नए सत्र के लिए जुलाई-अगस्त में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रदेश के 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में 15 फीसदी सीटें एनआरआई कोटे के लिए रिजर्व है।

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CG News: प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई महंगी, एमडी-एमएस की सीटें 32 लाख रुपए

CG News: यूएस डॉलर की ऊंची छलांग के कारण एनआरआई कोटे की एमबीबीएस सीटें तीन साल में 19.02 लाख व एमडी-एमएस की सीटें 32.61 लाख रुपए महंगी हो गई है। फीस विनियामक कमेटी ने फीस तो नहीं बढ़ाई है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपए के लगातार टूटने के कारण मेडिकल की पढ़ाई महंगी हो रही है। प्रदेश में पीजी में एडमिशन चल रहा है और छात्रों को ज्यादा फीस पटानी पड़ रही है।

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वहीं एमबीबीएस में नए सत्र के लिए जुलाई-अगस्त में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रदेश के 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में 15 फीसदी सीटें एनआरआई कोटे के लिए रिजर्व है। ये सीटें एमबीबीएस व एमडी-एमएस दोनों कोर्स के लिए है। पिछले साल एनआरआई कोटे में मचे बवाल के बाद पत्रिका ने पड़ताल की तो पता चला कि डॉलर लगातार चढ़ने के बाद भी एनआरआई कोटे की एक-एक सीट में प्रवेश के लिए मारामारी मची है।

साढ़े चार साल के कोर्स के लिए एक करोड़ 36 लाख

एमबीबीएस कोर्स के लिए प्रति वर्ष 35 हजार यूएसए डॉलर ट्यूशन फीस निर्धारित है। साढ़े चार साल के कोर्स के लिए छात्रों को एक करोड़ 36 लाख 36 हजार 350 रुपए देना होगा। यही फीस 2022 में एक करोड़ 17 लाख 33 हजार 750 रुपए था। यानी तीन साल में 19 लाख 2 हजार 600 रुपए फीस बढ़ गई। वहीं एमडी-एमएस के लिए सालाना 90 हजार डॉलर ट्यूशन फीस के हिसाब से वर्तमान फीस दो करोड़ 33 लाख 76 हजार 600 रुपए है।

जबकि 2022 में फीस 2 करोड़ एक लाख 15 हजार रुपए थी। यानी तीन साल में 32 लाख 61 हजार 600 रुपए की वृद्धि हो गई। 2022 में एडमिशन के समय प्रति डॉलर 74.50 रुपए के बराबर था, जो 2025 में बढ़कर 86.58 रुपए हो गया है। यानी तीन साल में 12 रुपए से ज्यादा की गिरावट रुपए में आई है।

एमबीबीएस की फीस एक नजर में

  • 2022 में- 11733750 रुपए
  • 2025 में- 13636350 रुपए
  • अंतर - 1902600 रुपए

एमडी-एमएस कोर्स की फीस इस तरह

  • 2022 में- 20115000 रुपए
  • 2025 में- 23376600 रुपए
  • अंतर- 3261600 रुपए

छग डीएमई डॉ. यूएस पैकरा छग एनआरआई कोटे की फीस तय है, जो छात्रों को यूएसए डॉलर में भुगतान करना होता है। रुपए में गिरावट से डॉलर महंगा हो जाता है और फीस में फर्क पड़ता है। फिर भी कॉलेजों में इस कोटे की सीटें हर साल भर जाती है। चाहे वह एमबीबीएस की सीटें हो या एमडी-एमएस कोर्स की। दोनों कोर्स की काफी डिमांड है।

बालाजी मेडिकल कॉलेज चेयरमैन डॉ. देवेंद्र नायक ने कहा रुपए के उतार-चढ़ाव के कारण एनआरआई कोटे की यूजी व पीजी सीटों की फीस कम ज्यादा होती रहती है। हालांकि इसके लिए फीस निर्धारित है। डॉलर महंगा होने का एनआरआई को खास फर्क नहीं पड़ता। कई पालक व छात्र इस कोटे के लिए संपर्क करते हैं। उनका एडमिशन मेरिट से काउंसलिंग कमेटी करता है।