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राज्यपाल एक संवैधानिक पद है..राजभवन में लॉर्ड गवर्नर बन कर रहे, ऐसा बिल्कुल नहीं है: अनुसुइया उइके

- एसईसीएल के गेट हाउस में राज्यपाल ने पत्रकारों से की बातचीत- बजट अभिभाषण के लिए गुमराह नहीं किया गया ..

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बिलासपुर. शनिवार को राज्यपाल अनुसुइया उइके अल्प प्रवास पर शहर पहुंचीं। एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के पहले उन्होंने सवा तीन बजे एसईसीएल के गेस्ट हाउस में पत्रकारों से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कुछ मुद्दों पर खुलकर बात की और कहा कि पहले से एक कांसेप्ट बन कर रह गया है कि जो राजभवन में आते हैं, वो राज्यपाल लॉर्ड गवर्नर बन कर रहे, ऐसा बिल्कुल नहीं है, क्योंकि राज्यपाल प्रदेश के शासन का संरक्षक होता है। उन्होंने सरकार और राज्यपाल के बीच टकराहट जैसी बात को स्पष्ट किया। उन्होंने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली की तारीफ भी की। पेश है, पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों और राज्यपाल द्बारा दिए गए जवाब का प्रमुख अंश:-

सवाल:- हाल ही में मुख्यमंत्री का एक बयान आया था कि राजनीति के अलावा और कई काम हैं, जिस पर राज्यपाल को ध्यान देना चाहिए।

जवाब:- राजनीति का तो कोई ये प्लेटफार्म होता नहीं है। राज्यपाल संवैधानिक पद होता है और जहंा तक लोगों की जो उपेक्षाएं हैं, उनकी जो उम्मीदें हैं।

उन्हें लगता है कि राजभवन में जाकर हमारी सुनवाई हो जाए और लोग मुझसे मिलते हैं तो इसमें राजनीति की कौन सी बात है। लोग मुझे बुलाते हैं। जगह-जगह कार्यक्रम में, आयोजनों में। अगर मेरे प्रति उनका स्नेह है। लोग अगर पैदल चलकर आ रहे हैं राजभवन, मुझसे मिलने के लिए। क्या मैं उनको बुलाती हूं। मुझसे मिलने आइए। आपने देखा होगा कि सरगुजा से करीब साढ़े तीन लोग मुझसे मिलने आए। बस्तर से करीब ढाई सौ लोग मिलने आए। करीब ढाई हजार नारायणपुर से आए पैदल चलकर। मैंने उनसे कहा कि मैं इतने सारे लोगों से एक साथ नहीं मिल पाऊंगी। 10-20 लोगों से ही मिल पाऊंगी। लेकिन उन्होंने कहा कि हम मिलकर ही जाएंगे। हम पूरी व्यवस्था करके आए हैं, तब मैं उनसे मिलने के लिए स्टेडियम गईं। निश्चित रूप से हर किसी की जिम्मेदारी होती है। हर जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होती है। ये तो केवल राजभवन तब आ रहे हैं, जब उनकी सुनवाई नहीं हो रही होगी। देखिए... यह कंासेप्ट पहले ही रहा है, जो राजभवन में आते हैं। वो लॉर्ड गवर्नर बनके ही राजभवन में रहे। ऐसा बिलकुल नहीं है। राज्यपाल प्रदेश के शासन का संरक्षक होता है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की जो योजनाएं है, वह लोगों तक पहुंचे। सरकार की जो नीतियां हैं, प्रदेश के हित में जो भी योजनाएं बनाई जाती हैंं, उसका इंप्लीपेमेंटशन हो। ये तमाम सारी चीजों को मैं कर रही हूं।

सवाल: ...तो फिर ये स्थितियां क्यों बन रही हैं कि मुख्यमंत्री को ऐसा कहना पड़ रहा है।

जवाब: ये तो उनसे ही पूछिए कि वे किस संदर्भ में ऐसा बोल रहे हैं। उन्होंने ऐसा क्यों कहा, इस संदर्भ में मुझे कुछ नहीं कहना है।

सवाल: क्या आप ये बताना चाहती हैं कि राज्यपाल का पद क्या होता है।

जवाब: बिलकुल... हमने एक पोर्टल लांच किया है, जिसमें राज्यपाल, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री का क्या काम है, यह लोगों को पता होना चाहिए और उनके क्या-क्या अधिकार हैं। जनमानस में यह जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि राज्यपाल के बारे में लोग इतना जानते नहीं थे। लोग सोचते थे कि उनसे मिलकर क्या करेंगे। ये पहली बार जब लोगों को लगा कि जो मेरे पास आता है, उनकी सुनवाई होती है। मेरे पास सभी दुखी पीडि़त लोग ही तो आते हैं, लेकिन मैंने ऐसी कोशिश की है कि सभी लोगों को साथ लेकर।

सवाल: मैडम... बीच-बीच में सरकार और राज्यपाल के बीच टकराहट की स्थिति पैदा हो जाती है, जब भी कोई नियुक्ति की बात आती है। जैसे की कुलपति को नियुक्ति को लेकर।

जवाब: देखिए... टकराहट की बात नहीं होती है, नीतिगत कोई मामले को अगर मैं मुद्दा उठाती हूं अगर, तो सरकार मेरी है न। अगर किसी बात को लेकर टकराहट की बात होती है तो संवैधानिक गरिमा को बनाए रखने के लिए आपको सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। ये चीजें मर्यादा के अंदर रहकर करें। मुख्यमंत्री को यह अधिकार है कि पूरे प्रदेश की अपनी गतिविधियों के बारे में राज्यपाल को अवगत कराएं। कोई भी मंत्री हो। वो हमने आकर मिले और बहुत सारी चीजों पर तो राज्यपाल के आदेश के अनुसार कार्रवाई होती है।

सवाल: प्रदेश में सरकार कैसे चल रही है।

जवाब: देखिए... प्रदेश की जो सरकार चल रही है। मैं तो कहूंगी कि प्रदेश के सभी वर्गों को लेकर सरकार ने योजना बनाई है। नीतियां बनाई हैं और बजट भाषण में भी मैंने ये कहा कि मेरी सरकार जो है, वह हर वर्ग के लिए बजट का प्रावधान किया है। निश्चित रूप से उसका लोगों तक लाभ मिले। चाहे गोठान योजना है, वो किसानों के लिए है। महिलाओं के लिए है। सभी चीजों के लिए सरकार ने बजट प्रावधान किया है, अच्छा किया है। मेरी दृष्टि से सरकार अच्छा काम कर रही है। जहंा मुझे लगता है कि यह सही नहीं है तो मैं ध्यान आ•ॢषत करती हूं।

सवाल : विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने गुमराह करके आपको अभिभाषण पढ़वाया था

जवाब : नहीं ..नहीं यह राज्यपाल का संवैधानिक अधिकार होता है। और राज्य पाल सरकार की संरक्षक होती है। और सरकार को जो बजट होता है उसे विधानसभा में पेश करते हैं। इसमें गुमराह करने जैसी कोई बात नहीं है।