14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ड्रीम प्रोजेक्ट चाय बागान में मवेशी चरा रहे किसान

मैनपाट को पर्यटन के नक्शे में लाने के लिए वन विभाग ने जशपुर की तर्ज पर यहां भी चाय की खेती की शुरूआत वर्ष 2019 में की थी। इसके लिए ग्राम पंचायत सरभंजा के ललैया के चार किसानों की जमीन चिन्हांकित की गई थी, लेकिन बजट के अभाव में न तो किसानों को फसल का फायदा हुआ और न ही उन्हें मजदूरी मिली।

less than 1 minute read
Google source verification
ड्रीम प्रोजेक्ट चाय बागान में मवेशी चरा रहे किसान

ड्रीम प्रोजेक्ट चाय बागान में मवेशी चरा रहे किसान

raipur/अंबिकापुर. मैनपाट को पर्यटन के नक्शे में लाने के लिए वन विभाग ने जशपुर की तर्ज पर यहां भी चाय की खेती की शुरूआत वर्ष 2019 में की थी। इसके लिए ग्राम पंचायत सरभंजा के ललैया के चार किसानों की जमीन चिन्हांकित की गई थी, लेकिन बजट के अभाव में न तो किसानों को फसल का फायदा हुआ और न ही उन्हें मजदूरी मिली। अब किसान इस चाय बगान में मवेशी चराने को मजबूर हैं।
ग्राम ललैया के चार किसानों की लगभग 2 हैक्टर भूमि चाय बागान के पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित किया गया था। इसके लिए किसानों द्वारा सहमति भी दी गई थी। इसकी घोषणा खाद्य व संस्कृति मंत्री द्वारा की गई थी। वन विभाग द्वारा इसके लिए किसानों को चाय बागान में लगने वाले मजदूरों की पारिश्रमिक देने की बात भी कही गई थी। लेकिन 6 माह से अधिक का समय बीत गया है, किसानों को उनका पारिश्रिमिक नहीं मिल सका है। इस संबंध में जब किसानों द्वारा स्थानीय वन अधिकारियों से बात की जाती है तो उनके द्वारा यही कहा जाता है कि उनके पास चाय बागान के लिए बजट नहीं है। अब किसानों के पास बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

- चाय बगान के लिए बजट अलग से स्वीकृत नहीं है, लेकिन डीएमएफ मद से इसके लिए बजट स्वीकृत कराया गया था। अगर किसान वहां मवेशी चरा रहे हैं तो इसका पता कर कार्रवाई की जाएगी।
- पंकज कमल, डीएफओ, सरगुजा वन वृत्त