
रायगढ़. रायगढ़ जिले में वन विभाग को बंदरों के नसबंदी की स्वीकृति क्या मिली। बंदर पकडऩे के लिए छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे प्रातों से संबंधित ठेकेदार की अर्जी विभाग के पास आने लगी है। जिसमें एक पत्र यूपी के पप्पू ठेकादार का था। जो त्वरित सेवा देने का दावा करते हुए बंदरों को पकडऩे के ठेका प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है।
बकायदा उक्त ठेेकेदार ने आवेदन पत्र के साथ अपना विजटिंग कार्ड भी लगाया है। जिससे विभाग को संपर्क करने में कोई परेशानी ना हो। विदित हो कि पिछले अक्टूबर माह में राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री ने रायगढ़ से बना कर ले जाए गए बंदरों के नसबंदी के प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी। नसबंदी से पहले बंदरों को एक्सपर्ट द्वारा पकडऩे की पहल होती है। एक तय समय अवधि के बीच रखे जाने के बाद उनकी नसबंदी होती है।
इसके लिए कैचर की टीम की दरकार होगी। यहीं वजह है कि रायगढ़ में बंदरों की नसबंदी की खबर, प्रदेश हीं नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों तक पहुंचने में देर नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि बंदरों के पकडऩे वाले ठेकेदारों का पत्र, रायगढ़ वन मंडल में आने लगा हैं। उन्हीं नामों में एक नाम पप्पू ठेकेदार का भी है। उत्तर प्रदेश के रहने वाले इस ठेकेदार ने अपने नाम के साथ ठेकेदार शब्द को जोड़ा है। जो खुद की टीम द्वारा बंदरों को पकडऩे में महारत हासिल होने की बात कह रहा है। नसबंदी से पहले बंदरों के पकडऩे की इस पहल में विभाग को कैचर की दरकार को देखते हुए ठेकेदार ने अपना विजटिंग कार्ड भी लगाया है। जिससे जब विभाग द्वारा बंदरों के पकडऩे की पहल शुरू की जाए। उससे पहले पप्पू ठेकेदार को भी याद किया जा सके।
विभाग सक्रिय
रायगढ़ वन मंडल में बंदरों से ज्यादा हाथियों का उत्पात है। जिसमें जान व माल, दोनों का नुकसान होता है। पर विभाग ने हाथी से बचाव को लेकर पुराने ढर्रे व गजराज प्रोजेक्ट के भरोसे हैं। जबकि बंदरों के उत्पात को बढ़ा चढ़ा कर मुख्यमंत्री के समक्ष बैठक में पेश किया गया। जिसकी वजह से उनको बंदरों की नसबंदी मामले की स्वीकृति मिलने में काफी आसानी हो गई।
Published on:
05 Dec 2017 03:06 pm
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