‘शिविर-पंडाल सिर्फ संत और VIP के लिए नहीं’
मलूक पीठ के पीठाधीश्वर और रेवासा धाम प्रमुख महंत राजेंद्र दास जी महाराज ने इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “यह हादसा क्यों हुआ? यदि हमारी बात से किसी को कष्ट पहुंचे तो हम पहले से ही क्षमाप्रार्थी हैं। विशाल शिविर और भव्य पंडाल केवल संतों, सेठों और साहूकारों के लिए ही नहीं, बल्कि जनता जनार्दन के लिए भी होते हैं। यदि आम श्रद्धालुओं के प्रति अधिक उदारता दिखाई जाती, तो लोग सुरक्षित रहते और यह त्रासदी टाली जा सकती थी।” उन्होंने आगे कहा, “श्रद्धालु 30 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे थे, उनकी थकान चरम पर थी। रातभर उन्होंने खुले आसमान के नीचे या सड़कों पर बैठकर समय बिताया। शाम 4 बजे तक लोग इतनी थकान और भूख से बेहाल थे कि वे कहने लगे – ‘अगर अन्न नहीं मिला, तो प्राण निकल जाएंगे।’ दुर्भाग्यवश, कई पंडालों में आयोजकों ने श्रद्धालुओं को अंदर जाने नहीं दिया, यह सोचकर कि भीड़ से व्यवस्था बिगड़ जाएगी।”
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