
GST एक साल: व्यापारियों ने कहा, मनमाने तरीके से किया गया लागू जीएसटी, छोटे व्यापारी और आम आदमी हैं परेशान
इलाहाबाद. देश की मोदी सरकार के महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल जीएसटी कानून को लागू हुए एक साल पूरे हो रहे हैं। जीएसटी को देशभर में लागू करने के बाद मोदी सरकार को व्यापारियों के बड़े विरोध का सामना करना पड़ा था। जीएसटी के कड़े नियमों में परिवर्तन का दबाव लगातार व्यापारी बनाते रहे है। जीएसटी कानून के मुताबिक़ मोदी सरकार ने एक देश एक कर का नाम देकर कानून लागू को लागू किया। सरकार का दावा था कि, जीएसटी लागू होने से देश में महगाई कम होगी, मूल्य घटेंगे, लेकिन व्यापारी पूरी तरह सेर मानने को तैयार नहीं है।
सरकार ने जीएसटी को लेकर किये थे बड़े दावे
जीएसटी कानून लागू होने पर सबसे छोटे व्यापारियों ने जीएसटी का विरोध करते हुए इसे सरकार द्वारा दिया जाने वाला बोझ बताया कहा कि, टैक्स में बदलाव किया जाए। लेकिन सरकार का यह कहना था कि, जीएसटी लागू करने के बाद व्यापारी और उद्योग जगत से जुड़े छोटे कारोबारियों को अलग-अलग तरह के दिए जाने वाले करो से मुक्ति मिलेगी। जिसमें ड्यूटी सर्विस टैक्स रेट मनोरंजन कर लग्जरी कर जैसे आज कर खत्म हो जाएंगे। सरकार का तर्क रहा है कि, जीएसटी लागू होने के बाद किसी भी सामान पर वही कर लगेगा, जहां पर यह सामान बिकेगा। साथ ही एक्साइज ड्यूटी, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी,सेंट्रल सेल्स टैक्स, रेट लग्जरी टैक्स, सर्विस कर ,अलग अलग नहीं लगेंगे सब जीएसटी के तहत होंगे।
क्या कहना है व्यापारियों का
वहीं जीएसटी के एक साल पूरे होने पर पत्रिका ने इलाहाबाद के व्यापारियों से बात की, व्यापारियों ने जीएसटी कानून को लेकर सरकार के खिलाफ हमला बोला। शहर के बड़े कारोबारी कादिर सेठ ने कहा कि, जीएसटी लागू करने से पहले सरकार ने अपना होमवर्क नहीं किया। जिसका भुगतान आम आदमी और छोटे व्यापारियों को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि, इस साल व्यापारी अपने कारोबार का असेसमेंट तक नहीं कर पाए हैं। वो कैसे काम करेंगे, जीएसटी में अभी लगातार बदलाव जारी है। सरकारी विभाग के अधिकारी भी अभी पूरी तरीके से जीएसटी पर जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में सरकार की मनमानी के कानून के चलते आम आदमी परेशान हो रहा है।
शहर के बड़े व्यापारी विजय अरोड़ा ने कहा कि, जीएसटी के कानून का कोई विरोध नहीं है। लेकिन इसमें सुधार जरूरत है। इसे कानून को पांच साल पहले ही आ जाना चाहिए था। लेकिन इसकी जो खामियां है।उसमें बदलाव करना बहुत जरूरी है। विजय अरोड़ा ने कहा कि, सरकार को कानून लागू करने के बाद विभाग के अधिकारी चार्टर्ड अकाउंटेंट और व्यापारियों के साथ साझा कार्यशाला करवानी चाहिए थी।
जिससे एक दूसरे से इस कानून के बारे में सही तरीके से जानकारी मिल सकती।सरकार ने जीएसटी में उन्हीं विषयों पर बदलाव किया, जो उनको ठीक लगा। व्यापारियों के हित को ध्यान में नहीं रखा गया।अरोड़ा ने कहा कि, फीताशाही खत्म होनी चाहिए। कानून में बदलाव लाना चाहिए। जुर्माना जेल जैसे नियमों को खत्म करना चाहिए।
शहर के युवा व्यापारी हसीब अहमद ने बताया कि, जीएसटी कानून के जरिये सरकार आम आदमी से गुंडा टैक्स वसूल रही है। 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर मोदी सरकार ने आम आदमी को महंगाई की कुएं में ढकेल दिया है। सामान अपने दामो से तीन गुना ज्यादा महंगे दामो पर मिल रहा है। सरकार ने बिना तैयारी किये मनमाने तरीके से कानून लागू किया है और टैक्स के नाम पर धन उगाही का काम जारी है।
प्रसून पांडेय
Published on:
30 Jun 2018 06:16 pm
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