राहुल गांधी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी और कांग्रेस नेता के. राजू की पुस्तक ‘द दलित ट्रूथ: द बैटल्स फॉर रियलाइजिंग आंबेडकर्स विजन’ के विमोचन पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और केंद्र सरकार पर सवाल भी उठाए।
यह भी पढ़ें – AAP नेता मनीष सिसोदिया का दावा, हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री बदलने वाली है BJP, जानिए कौन बनेगा सीएम? राहुल गांधी ने कहा, ‘हमें संविधान को बचाना पड़ेगा। संविधान को बचाने के लिए हमें संस्थानों की रक्षा करनी पड़ेगी। लेकिन सभी संस्थान आरएसएस के नियंत्रण में हैं।’ इस दौरान राहुल ने कहा कि उन्हें सत्ता में विपक्ष नहीं है। उन्होंने कहा, ‘यहां नेता हैं, चो सत्ता के पीछे लगे हुए हैं।
वे हमेशा सत्ता हासिल करने के बारे में सोचते रहते हैं…अब उसमें मेरी एक परेशानी आ गई, मैं सत्ता के एकदम बीच में पैदा हुआ, लेकिन सच कहता हूं मुझे इसमें दिलचस्पी नहीं है। इसके बजाए मैं देश को समझने की कोशिश करता हूं।’
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वे हमेशा सत्ता हासिल करने के बारे में सोचते रहते हैं…अब उसमें मेरी एक परेशानी आ गई, मैं सत्ता के एकदम बीच में पैदा हुआ, लेकिन सच कहता हूं मुझे इसमें दिलचस्पी नहीं है। इसके बजाए मैं देश को समझने की कोशिश करता हूं।’
राहुल ने दावा किया कि सीबीआई, ईडी, और पेगासस के जरिये राजनीतिक व्यवस्था को नियंत्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमने (उत्तर प्रदेश चुनाव में) मायावती जी को संदेश दिया कि गठबंधन करिये, मुख्यमंत्री बनिए, लेकिन (उन्होंने) बात तक नहीं की।’
एक रुपया भी लिया होता भाषण नहीं दे पाता
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा, ‘अगर मैंने एक रुपए भी लिया होता तो यहां भाषण नहीं दे पाता।’ राहुल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा पर देश की संस्थाओं को नियंत्रित करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘ संविधान हिंदुस्तान का हथियार है, लेकिन संस्थाओं के बिना संविधान का कोई मतलब नहीं है।’ राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि, आज सभी संस्थाएं आरएसएस के हाथ में हैं।
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