
क्यों कहा जाता है इन्हें मां चंद्रघंटा
इन देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने के समान तथा दस हाथ वाला है। इन हाथों में खड्ग, अस्त्र-शस्त्र और कमंडल विद्यमान हैं।
ऐसे करें मां चंद्रघंटा की पूजा
मां चंद्रघंटा के चित्र अथवा प्रतिमा को सुन्दर ढंग से सजाकर फूल-माला अर्पण करें। उसके बाद दीपक जलाएं, प्रसाद चढ़ाएं और मन, वचन और कर्म से शुद्ध होकर निम्न मंत्र का 108 बार जप करें।
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
इन्हें भोजन में दही और हलवा का भोग लगाया जाता है। पूजा पूर्ण करने के बाद मां चंद्रघंटा मनचाही प्रार्थना पूरी करती है।
क्या फल मिलता है मां चंद्रघंटा की पूजा से
इनकी पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को दिव्य सुंगधियों का अनुभव होता है और कई प्रकार की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं। इनकी कृपा से भक्त इस संसार में सभी प्रकार के सुख प्राप्त कर मृत्यु के पश्चात मोक्ष को प्राप्त करता है।
Published on:
23 Sept 2017 09:37 am
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