-सुरेश हेमनानी
पाली। क्या यह आदिकाल का जमाना है? कौनसी सदी में जी रहे है? हे भगवान, ये हालात। लाखों लोगों के लिए पीने के लिए माइन्स (गड्ढ़ों) में एकत्रित हुए पानी को तलाशा गया और विकसित और आधुनिक माने जाने वाले शहर पाली की जनता इसको पी रही है। हालात इससे बदत्तर क्या होंगे कि बारिश नहीं हुई तो यह पानी भी रीत जाएगा? फिर क्या होगा?
जवाई बांध रीतने के बाद पाली के लिए अब तीन माइन्स तलाश कर उनमें जमा पड़े बरसाती पानी को पाइप लाइन के जरिए पाली शहर की ढाई लाख जनता को पिलाया जा रहा है। महकमा कहता है कि यह पानी पीने योग्य है, विधायक कहते है पीने जैसा तो नहीं। पाली शहर के लिए पानी की आपूर्ति का जरिया जवाई बांध है, जो बरसाती पानी से लबालब हों तो शहर को पानी मिले। जवाई बांध करीब दो माह पूर्व रीत गया तो पाली में पानी की भयंकर किल्लत खड़ी हो गई। अब, इसकी वैकल्पिक व्यवस्था पर सरकार आई तो जोधपुर से एक वाटर ट्रेन शुरू की गई, जिसमें प्रतिदिन 6 एमएलडी पानी आने लगा लेकिन शहर की जरूरत 20 एमएल ज्यादा है। 14 एमएल पानी की कमी को कहां से पूरा किया जाए, तब महकमे ने ऐसी खानें माइंस तलाश की जिनमें बरसाती पानी जमा हों। जाडन में यह खानें मिली, जहां बरसाती पानी एकत्रित था, इस पानी को जरिए पाइप लाइन अब पाली को पिलाया जा रहा है। 28 मई से 6 एम एल पानी पहुंच रहा है, शहर की जरूरत अभी भी पूरी नहीं है। हालात यह है कि पाली में पानी को लेकर अब प्रतिदिन लोग बारिश होने की प्रार्थना कर रहे है ताकि जवाई भरे तो भरपूर पानी मिले।
माइन्स का पानी फिल्टर करते है
विभागीय दावा है कि जाडन से आने वाले पानी को मंडली हैडवर्क्स पर फिल्टर किया जा रहा है और इसके बाद आपूर्ति होती है। इस पानी में भी स्थानीय जलस्रोतों के पानी की मिलावट होती है।
योजनाएं दूर की कौड़ी
-जवाईबांध पुर्नभरण : बरसात आएगी तो जवाई बांध को भरा जाएगा और गुजरता जाने वाले -पानी को रोककर यह पुर्नभरण करने की योजना है।
–राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल योजना तृतीय चरण जो जोधपुर तक आएगी, यह कार्य अभी तक दूर है।
–जवाई बांध भरने के बाद सिंचाई व पेयजल के पानी के बंटवारे को संतुलित करना, यह मामला भी विचाराधीन है।
जवाई बांध ही सहारा
स्थाई व्यवस्था तो जवाई बांध ही है। इस बार पानी रीत गया, वरना कमी नहीं रहती। इसलिए विकल्प में खानें तलाशी गई है और इन खानाें में पानी को फिल्टर करके दिया जा रहा है। यह पानी पिने योग्य है, जांच की गई है। –मनीष माथुर, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग, पाली
पिने योग्य नहीं
माइंस का पानी पिने योग्य नहीं है। इसमें स्थानीय स्तोत्र का पानी मिला कर आपूर्ति हो रही है। पानी में टीडीएस ज्यादा है, लोग इसको पेयजल के अलावा काम में ले रहे हैं। –ज्ञानचंद पारख, विधायक, पाली