
Women are performing exceptionally well in economic, social, political, and other fields.
पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
महिलाएं आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक आदि सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन फिर भी पितृसत्तात्मक सोच के चलते उन्हें उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। महिलाओं को निर्णय लेने में स्वतंत्रता होनी चाहिए। तलाक जैसे मुद्दों पर केवल महिला को दोषी न ठहराया जाए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए और उत्पीड़न के मामलों में दोषियों को सजा अवश्य दी जाए ताकि यह संदेश समाज में जाए कि महिला कमजोर नहीं है।
जब-जब महिला उत्पीड़न को रोकने की बात उठी है, हमारे द्वारा सभी उपाय अपना लेने के बावजूद भी हम आज तक महिलाओं पर उत्पीड़न की घटनाओं को रोक नहीं पाए हैं। इसका कारण यह है कि समस्या की जड़ परिवार और हमारे अपनों से जुड़ी हुई है। यदि पारिवारिक स्तर पर ही महिलाओं का सम्मान करना सीख लिया जाए तो स्वत: ही समस्या का समाधान हो जाएगा। सबसे बड़ी जिम्मेदारी हम महिलाओं की ही है, जो अपने बच्चों में स्त्री सम्मान के नैतिक गुणों का विकास करें। साथ ही अपनी पीड़ित बहनों की हर संभव सहायता करें। अपनी समुदाय की महिलाओं को शिक्षा और उनके अधिकारों के महत्व के बारे में बताएं। अगर कोई महिला उत्पीड़न का शिकार हुई है, तो उसे बिना जज किए सुनें और भावनात्मक समर्थन दें। अपने कार्यों और विचारों से दूसरों को प्रेरित करें कि उत्पीड़न सहने के बजाय, इसका डटकर सामना करें। एक महिला के छोटे-छोटे प्रयास ही बड़ी संख्या में महिलाओं की जिंदगी को बदल सकते हैं। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए खुद से शुरुआत करना सबसे अच्छा तरीका है।
महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए उन्हें शिक्षित करना और मानसिक रूप से सशक्त बनाना बेहद जरूरी है। इसके लिए महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों की जानकारी देना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, और दहेज प्रताड़ना जैसे मामलों से निपटने के लिए कानूनी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करना आवश्यक है।
महिलाओं के साथ उत्पीड़न तभी रुक सकता है जब शिक्षा को साधन बनाया जाएगा क्योंकि पढ़ी-लिखी पीढ़ी कभी किसी पर अत्याचार कर ही नहीं सकती। वह केवल तर्कों से बात करती है।
महिलाओं को आत्मरक्षा का समुचित प्रशिक्षण देकर, कड़े कानून बनाकर तथा कानून में त्वरित निर्णय की प्रक्रिया अपनाकर महिला उत्पीड़न को रोका जा सकता है। साथ ही जिस महिला के साथ उत्पीड़न होता है, उसे तुरंत निर्भीक होकर पुलिस स्टेशन में अपनी पीड़ा दर्ज करानी चाहिए।
महिलाओं का शिक्षित न होना उनके उत्पीड़न के लिए अधिक जवाबदेह है। शिक्षित महिलाएं अपने अच्छे-बुरे को जल्दी समझ लेती हैं और किसी भी जोर-जबरदस्ती का दिलेरी से सामना कर सकती हैं। पढ़ी-लिखी महिला उत्पीड़न की शुरुआत होने पर ही कानून का सहारा लेकर इसे रोकने का प्रयास कर सकती है। समाज में महिलाओं के प्रति व्याप्त कुरीतियों को मिटाकर भी उत्पीड़न जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
पुरुषों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी
महिलाओं का उत्पीड़न रोकने के लिए पुरुषों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी। महिलाएं किसी की जागीर नहीं हैं और न ही वे भोग-विलास की वस्तु हैं। वे वंदनीय और पूजनीय हैं। आज के समय में वे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। अत: पुरुष वर्ग अपनी मानसिकता बदले। नारी को पूरा मान-सम्मान देकर ही महिलाओं का उत्पीड़न रोका जा सकता है।
टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर लागू हो
महिलाएं कहीं भी आते-जाते समय या कार्यस्थल पर अकेली होती हैं। उनकी सुरक्षा के लिए सरकार को एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर शुरू करवाना चाहिए ताकि महिलाएं विपदा आने पर तुरंत शिकायत कर सकें और उन्हें उत्पीड़न से बचाया जा सके।
वर्तमान समय में मासूम बच्ची से लेकर वृद्ध महिलाएं तक यौन उत्पीड़न की शिकार हो रही हैं। इसका एक मुख्य कारण सोशल मीडिया पर उपलब्ध अश्लील सामग्री है, जिससे पुरुषों की मानसिकता पर गलत प्रभाव पड़ रहा है। यौन उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि हो रही है। अगर सरकार इसे प्रतिबंधित कर दे तो यह देशहित में होगा। महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए सतर्क रहें। हो सके तो जूडो-कराटे का प्रशिक्षण लें। हमारी न्याय व्यवस्था में भी ऐसे मामलों की शीघ्र प्रक्रिया अपनाकर अपराधियों को सजा देनी चाहिए। अपराधियों को दया याचिका या जमानत का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
घर में कैद से बाहर निकलने पर महिलाएं समाज से लड़ने और अपने प्रति जागरूक होने के काबिल बनेंगी। उन्हें केवल रसोई या पशुओं की देखरेख तक सीमित न रखें। यदि उन्हें बाहर की दुनिया और संविधान की जानकारी मिलेगी, तो वे समझ पाएंगी कि संविधान निर्माण में पुरुषों के साथ महिलाओं का भी योगदान है।
Published on:
26 Nov 2024 12:42 pm
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