
भारतीय समाज और लोकतंत्र दोनों में केवल कमियां ही हैं, ऐसा नहीं कहा जा सकता। भारतीय समाज और लोकतंत्र में तमाम मतभिन्नताओं के बाद भी भारतीय समाज की वैचारिक जड़ें बहुत मजबूत होकर व्यापक दृष्टिकोण लिए हुए हैं। फिर भी आज के भारत में नागरिकों की तेजस्विता में कमी आना और भीड़तंत्र की गतिविधियों में तेजी आना काल की एक बड़ी चुनौती है। आज आभासी भारत और सूचना प्रौद्योगिकी ने ऐसा वातावरण खड़ा किया है जिससे भारतीय समाज में ऐसे मुद्दे खड़े हो गए हैं जो मानो भारत में अविवेकी समाज की रचना कर रहे हैं। आज के भारत और दुनिया में प्रत्यक्ष लोकसम्पर्क लुप्तप्राय हो गया है। आभासी गतिविधियों को ही जीवन समाज और लोकतंत्र का पर्याय मानने की दिशा में हम सब निरंतर आंखें बंद कर बढ़ते ही जा रहे हैं, जो बड़ी विडम्बना है। यही वह बुनियादी सवाल है जो आज हम सब से उत्तर मांग रहा है।
Updated on:
17 Oct 2022 10:38 pm
Published on:
17 Oct 2022 07:18 pm
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