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सिरोही. सीएमएचओ सिरोही के नाम से रजिस्टर्ड एम्बुलेंस से आबूरोड निवासी एक युवक की मृत्यु होने के प्रकरण में मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण आबूरोड के आदेश के बाद भी पीडि़त परिवार को मुआवजा राशि नहीं देने पर कोर्ट के आदेश पर बुधवार को सीएमएचओ कार्यालय को सील कर दिया गया। प्रकरण में कोर्ट ने 2018 में क्लेम अवार्ड पारित कर सीएमएचओ सिरोही को 18 लाख रुपए प्रार्थीगण को देने के आदेश दिए थे। सीएमएचओ की ओर से राशि अदा नहीं करने पर मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण संख्या 1 के न्यायाधीश मोहित शर्मा ने वसूली के आदेश जारी किए। जिसकी पालना में सीएमएचओ कार्यालय को कुर्क कर सील करने की कार्रवाई की गई। सभी कार्मिकों को बाहर निकालने के बाद दोपहर 2.40 बजे संपूर्ण कार्यालय परिसर को सील कर न्यायालय के अधीन ले लिया गया।
6 वर्ष बाद भी जमा नहीं कराए 18 लाख, कुडक़ी की कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2016 में सीएमएचओ सिरोही के नाम से रजिस्टर्ड एम्बुलेंस की टक्कर से आबूरोड निवासी युवक अल्पेश सेन की मौत हो गई थी। एम्बुलेंस का बीमा भी नहीं था। उसके वारिसों की ओर से मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण संख्या एक आबूरोड में क्लेम पेश किया गया। जिस पर माननीय अधिकरण ने 3 मई, 2018 को क्लेम अवार्ड पारित करते हुए सीएमएचओ सिरोही को 18 लाख रुपए पीडि़त परिवार को अदा करने के आदेश पारित किए थे। सीएमएचओ सिरोही द्वारा राशि अदा नहीं करने पर प्रार्थीगण के अधिवक्ता महेंद्र कुमार शर्मा व ओमप्रकाश प्रजापत द्वारा वसूली के लिए इजराय की कार्रवाई दर्ज कराई गई। करीब 6 वर्ष बाद भी सीएमएचओ सिरोही द्वारा अवार्ड की राशि जमा नहीं कराने पर मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरण संख्या एक आबू रोड के न्यायाधीश मोहित शर्मा द्वारा वसूली के लिए कुडक़ी आदेश जारी किया गया। जिसकी पालन में बुधवार को न्यायालय के नजीर द्वारा प्रार्थीगण के अधिवक्ताओं की उपस्थिति में कुडक़ी की कार्रवाई कर सीएमएचओ कार्यालय को सील किया गया।
संपूर्ण भवन सील, नोटिस चस्पा
जिला न्यायालय सिरोही के सेल अमीन मनीष त्रिवेदी ने बताया कि एमएसीटी कोर्ट एडीजे वन आबूरोड की ओर से 2018 की इजराय सुशीला देवी बनाम सीएमएचओ सिरोही के तहत कुर्की वारंट प्राप्त हुआ था। इसी के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई। सुबह सीएमएचओ के कार्यालय को सील किया गया। इसके बाद कर्मचारियों को बाहर निकालकर संपूर्ण भवन परिसर को सील कर दिया। साथ ही बाहर एक नोटिस चस्पा किया है कि सीएमएचओ कार्यालय को कुर्क कर न्यायालय के अधीन लिया जाता है। न्यायालय की अनुमति के बिना इसका ताला नहीं खोला या तोड़ा जावें।