Bihar News: आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बनाई गई थी टीम
Bihar News: सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक पश्चिम चंपारण बेतिया के आदेशानुसार कांड के उद्वेदन के लिए एक टीम का गठन किया गया। टीम में शिकारपुर थानाध्यक्ष अवनीश कुमार, अपर थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार, एसआई संजय कुमार , पुअनि राजेश कुमार और तकनीकी सहायक बबलू कुमार शामिल हुए। गठित टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी अनुसंधान से अपहृत को सीतामढ़ी जिला के सहियारा थाना क्षेत्र से बरामद कर घटना में शामिल छह अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। सीतामढ़ी के सहियार थाना के जलसी गाव के सुधीर सिंह दीपक कुमार उर्फ अमरेश सिंह , मटियार कला के रितेश सिंह, अनमोल कुमार, बगहा पुलिस जिला के पटखौली निवासी राकेश कुमार और शिकारपुर थाना के पुरैनिया गांव निवासी लाल बाबू राम को गिरफ्तार किया गया है।
Bihar News: सारण : जिलाधिकारी ने सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया
Bihar News: छपरा. बिहार में सारण के जिलाधिकारी अमन समीर ने बुधवार को सदर अस्पताल छपरा का औचक निरीक्षण किया।सारण के जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रविन्द्र कुमार ने यहां बताया कि निरीक्षण के दौरान सभी चिकित्सक और कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर तैनात दिखे। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के द्वारा सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सको,कर्मचारियोंकी उपस्थिति की जांच, अस्पताल में उपलब्ध दवाओं की जांच, पैथोलॉजी सुविधाओं आदि की जांच की गई। कुमार ने बताया कि जिलाधिकारी ने मरीजों एवं उनके परिजनों से अस्पताल में चल रहे उनके ईलाज तथा दवाओं से संबंधित उनकी समस्याओं की जानकारी लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया।
Bihar News: बिहार में डिजिटल अरेस्ट का बढ़ा खौफ
Bihar News: पटना। बिहार में डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी से जुड़े करीब 300 मामले सामने आए हैं, जिससे करीब दस करोड़ की ठगी की गई है। साइबर अपराध का लेखा-जोखा रखने वाले नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के जरिए बिहार पुलिस को डिजिटल अरेस्ट की 300 शिकायतें मिली हैं।आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के अनुसार, समय पर सूचना मिलने पर करीब 1.5 करोड़ की राशि को होल्ड कराया गया है। डिजिटल अरेस्ट को लेकर सभी जिलों के साइबर थानों एवं अन्य संस्थानों से समन्वय कर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। ईओयू ने डिजिटल अरेस्ट जैसी बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आम लोगों को सचेत भी किया है। ईओयू ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी आधिकारिक संचार के लिए वाट्सएप या स्काइप जैसे प्लेटफार्म का उपयोग नहीं करती है। इसके अलावा पहचान पत्र, एफआइआर की प्रति, गिरफ्तारी वारंट भी ऑनलाइन साझा नहीं किया जाता है। अगर किसी भी व्यक्ति को ऐसे कॉल आते हैं तो घबराएं नहीं।