परीक्षाएं टाइमिंग में बदलाव
नौवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा 5 फरवरी से 22 फरवरी तक सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगी, जबकि 11वीं कक्षा की परीक्षा 3 फरवरी से 22 फरवरी तक दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। इस वर्ष की परीक्षा में एक नई व्यवस्था की गई है, जिसके तहत विद्यार्थियों को परीक्षा कक्ष में पहुंचने का समय आधा घंटा पहले देना होगा, यानी उन्हें परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा।
प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी मप्र राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद की
मप्र राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद को प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा आयोजन तक की जिम्मेदारी दी गई है। प्रश्नपत्र अब राज्य स्तर पर तैयार किए जाएंगे, जो जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से संबंधित स्कूलों तक भेजे जाएंगे। हालांकि, कुछ प्रश्नपत्र जिला स्तर पर भी तैयार किए जाएंगे। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि वे संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों के माध्यम से जिला स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालयों में विषय शिक्षक द्वारा प्रश्नपत्र तैयार करवाएं। यह सुनिश्चित किया गया है कि जो शिक्षक प्रश्नपत्र तैयार करेंगे, उन्हें माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा विशेष रूप से प्रश्नपत्र निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया हो।
बोर्ड परीक्षा जैसा अनुभव दिलाने का प्रयास
मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल (माशिमं) का उद्देश्य इस प्रक्रिया के माध्यम से छोटे कक्षाओं के विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षा जैसा अनुभव प्रदान करना है। माशिमं ने यह कदम उठाया है ताकि बच्चे बोर्ड परीक्षा के माहौल से परिचित हों और परीक्षा के दौरान असहज न महसूस करें। बच्चों को एक पूर्व अनुभव देने से उन्हें आगे चलकर बोर्ड परीक्षा में मानसिक दबाव और घबराहट का सामना करने में मदद मिलेगी।जिला शिक्षा अधिकारियों की भूमिका
इस प्रक्रिया में जिला शिक्षा अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक स्कूल में परीक्षा की सभी तैयारियां ठीक से हो और किसी भी तरह की विघ्न बाधा उत्पन्न न हो। साथ ही, वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि प्रश्नपत्र समय पर स्कूलों तक पहुंचे और किसी भी प्रकार की परीक्षा में धांधली की संभावना न हो।परीक्षा की तैयारी में बदलाव और नए दिशा-निर्देश
इन बदलावों के अलावा, लोक शिक्षण संचालनालय ने परीक्षाओं से संबंधित कुछ नए दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें विद्यार्थियों को मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और किसी भी प्रकार की नकल सामग्री लाने की अनुमति नहीं होगी। परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की नकल या अनुशासनहीनता की स्थिति उत्पन्न न हो।
सजगता और मानसिक तैयारी की आवश्यकता
यह पहल विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। राज्य स्तर पर प्रश्नपत्र तैयार होने से परीक्षा में समानता और पारदर्शिता बनी रहेगी, वहीं बच्चों को बोर्ड परीक्षा का अनुभव होने से उन्हें आगे आने वाली चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। अभिभावकों और शिक्षकों से यह उम्मीद की जा रही है कि वे विद्यार्थियों को परीक्षा के माहौल के बारे में पहले से ही समझाएंगे और उनकी मानसिक तैयारी को मजबूत करेंगे। यह कदम राज्य सरकार की तरफ से विद्यार्थियों को और बेहतर शिक्षा देने और परीक्षा के दबाव से निपटने के लिए उठाया गया है। विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों को भी इन दिशा-निर्देशों और व्यवस्थाओं के तहत अपनी तैयारी को अंतिम रूप देना होगा ताकि यह परीक्षा सरल, प्रभावी और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।