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भारतीय शास्त्रीय नृत्य को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए: डॉ बसंती रामचंद्रन

इंडियन क्लासिकल डांसेस: द हीलिंग पावर का विमोचन ‘भारतीय शास्त्रीय नृत्य शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है’ -तनावपूर्ण परिस्थितियों का बेहतर ढंग से मुक़ाबला करने में सहायक है नृत्य और संगीत

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भारतीय शास्त्रीय नृत्य के उपचारात्मक पहलुओं पर लिखी गई पुस्तक -'इंडियन क्लासिकल डांसेस: द हीलिंग पावर' का विमोचन

अनुराग मिश्रा

नई दिल्ली। भारतीय कला और संस्कृति को देश के प्रत्येक बच्चों को सिखाने के लिए मुहिम चलानी होगी। माता पिता और पूरे समाज को देश के नौनिहालों को भारतीय संगीत और भारतीय नृत्य सीखने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

उम्र के हर पड़ाव के तनावों से नृत्य के ज़रिए छुटकारा मिलेगा

यह कहना था कलावती बाल अस्पताल की पूर्व मुख्य चिकित्सक डॉक्टर वासंती रामचंद्रन का।
डॉक्टर राम चंद्र ने नृत्य की महत्ता पर ज़ोर डालते हुए कहा कि इसके ज़रिये बड़े से बड़ा तनाव से छुटकारा पाया जा सकता है। यही नहीं, इसके अलावा कठिन परिस्थितियों में मानसिक संतुलन के साथ साथ अलग अलग उम्र के पड़ाव की तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में भी नृत्य सहायक है।
डॉक्टर रामचंद्रन नृत्य पर लिखी गई किताब -इंडियन क्लासिकल डांसेस: द हीलिंग पावर, के विमोचन के मौक़े पर बोल रही थी।

नृत्य की उपचारात्मक खूबियों की जानकारी

कनक सुधाकर द्वारा भारतीय शास्त्रीय नृत्य की अलग अलग विधाओं, उसकी खूबियों और उसके आध्यात्मिक और उपचारात्मक विशेषताओं और खूबियों के बारे में किताब में विस्तार से लिखा गया है। इस पुस्तक में बतायी गई नृत्य की उपचारात्मक विशेषताओं को किताब की लेखिका कनक सुधाकर की दो सहयोगियों अपराजिता और अंजली मुंजाल ने लोगों के सामने मित्र के ज़रिए प्रस्तुत भी किया।

फेफड़ों, हृदय और नर्वस सिस्टम को दुरुस्त रखता है भारतीय शास्त्रीय नृत्य

पुस्तक लेखिका यात्रा कनक सुधाकर ने बताया कि नृत्य के ज़रिये फेफड़ों और हृदय की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा मसल पावर के साथ साथ धमनियों में रक्त का संचार और नर्वस सिस्टम को भी बेहतर बताया बनाया जा सकता है।

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र में हुए कार्यक्रम में लीला वेंकटरमन, मामौला नायक और कलानिधि विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर रमेशचंद्र ग़ौर भी मौजूद थे।