
sainkheda
गाडरवारा-सांईखेड़ा। दादा धूनीवाले की नगरी सांईखेड़ा वर्षों से नगर परिषद एवं तहसील का दर्जा प्राप्त करने के बावजूद समस्याओं के साये में है। भले ही यहां नगर परिषद बनकर नगरीय क्षेत्र का दर्जा प्रदान किया गया है। लेकिन नगर में अनेक व्यवस्थाएं गांवों से भी गई बीती हैं। बरसों से नगरवासी सांईखेड़ा में अनेक मांगें करते रहे हैं। लेकिन उन पर अब तक कोई विचार नहीं किया गया है। इससे लोगों को नगरीय निकाय में रहने के बाद गांवों से बदतर अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। यहां तहसील का दर्जा तो मिला है लेकिन तहसील भवन नहीं है। वहीं कामकाज के लिए आज भी गाडरवारा पर निर्भर रहना पड़ता है। सांईखेड़ा में कॉलेज भी खुला लेकिन उसका भी कोई निजी भवन नही है। ऐसे ही नगर में बसों को सड़क किनारे खड़ा होना पड़ता है। क्योंकि नगर में बस स्टैंड का घोर अभाव है। यात्री प्रतीक्षालय के नाम पर लोगों को दुकानों पर बैठकर समय गुजारने में रुपए खर्च करने पड़ते हैं। क्योंकि यात्री प्रतीक्षा का भी यहां घोर अभाव है। सांईखेड़ा में बने मिटटी परीक्षण केंद्र में एक ग्राम मिटटी का भी परीक्षण नहीं हुआ। मंडी होते हुए बंद पड़ी है। नगर की आबादी दिनों दिन बढऩे एवं वाहनों की संख्या बढऩे से सड़क पर जाम के नजारे देखे जाते हैं। नगर के बीचों बीच से स्टेट हाईवे 44 गुजरी है। इसके बजाय एक नए बाईपास की मांग भी नगरवासी करते रहते हैं। नगर को पवित्र तीर्थ के दर्जे की मांग, प्रचीन ऐतिहासिक नरहरियानंद तालाब का संरक्षण। अस्पताल में एंबूलेंस, एक्सरे, सोनाग्राफी सुविधा, विभागों में पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति, पृथक कन्या उमा शाला जैसी अनेक मांगें गाहे बगाहे लोग उठाते रहते हैं। वहीं नगर परिषद संबंधी मांगों में मुक्तिधाम का विकास, वार्डों में सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, सफाई जैसी मांगें शामिल हैं। अब चुनाव के बाद नए जनप्रतिधि के चुने जाने पर उनके समक्ष भी नगर की प्रमुख मांगें रखे जाने का मन नगरवासी बना रहे हैं। देखने वाली बात रहेगी कि आने वाले सालों में इनमें से कितनी मांगें पूरी हो पाती हैं।
Published on:
10 Dec 2018 06:19 pm
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