
झाडफ़ूंक के चक्कर में चली गई जान, रेबीज संक्रमित बच्ची की मौत
narmdapuram पिपरिया. शहर के गांधी वार्ड पुरानी बस्ती क्षेत्र में रहने वाली साढ़े चार साल की रेबीज संक्रमित बच्ची की झाडफ़ूंक के चक्कर में जान चली गई। लड़की काव्या को कुत्ते ने काट लिया था, लेकिन मां-बाप अस्पताल में समुचित इलाज कराने इंजेक्शन के पूरे डोज नहीं लगवाए और एक माह तक झाडफ़ूंक ही करते रहे। केस बिगड़ गया। पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जांच में पाया कि बच्ची के परिजनों ने गंभीर लापरवाही बरती गई, जो रेबीज संक्रमण से मौत का कारण बनी। बच्ची के संपर्क में आए आठ लोगों को रैबीज टीके लगाए जा रहे हैं।
काटने के तीसरे दिन ले गए अस्पताल
घर के आंगन में खेलते समय काव्या को एक आवारा कुत्ते ने 18 मार्च को आंख और नाक के बीच में काट लिया था। बच्ची को घाव हो गया। कुत्ते के काटने के बाद चेहरे पर सूजन आ जाने के कारण माता-पिता दो दिन बाद बच्ची को सरकारी अस्पताल पिपरिया लाए। अस्पताल में 20 मार्च को बच्ची का प्राथमिक उपचार करने के साथ रैबीज संक्रमण को रोकने का पहला टीका लगाया गया था।
बहुत बड़ी लापरवाही
बीएमओ डॉ ऋचा कटकवार ने ओपीडी की पर्ची दिखाते बताया 20 मार्च को पहला टीका लगाने के बाद बाकी के चार टीके किन तारीखों में लगेंगे यह पर्ची पर लिखा हुआ था। इसके बाद बच्ची के माता-पिता बच्ची को निर्धारित तारीखों पर नहीं लाए। बच्ची के पिता दीपक सोनी और मां खुशी ने जिले से आए एपिडर्मियोंलॉजिस्ट आरएस चौहान और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को बताया कि पहला टीका लगवाने के बाद वह बच्ची को झाडफ़ूंक करने वाले एक आदमी के पास ले गए। लगभग एक माह झाड़-फूंक करवाते रहे।
इलाज न कराने से खो दी बच्ची
काव्या को प्यास तो लगती, लेकिन पानी गले के नीचे नहीं उतर रहा था। वो अपने हाथों से अपनी मां और परिवार के लोगों को नोंचने-खसोटने की कोशिश करती थी। मां ने बताया उनके हाथों और पीठ पर नाखून के निशान बने हैं। 20 अप्रैल को परिजन बच्ची को लेकर सरकारी अस्पताल पिपरिया लाए। तब तक काव्या की हालत गंभीर हो चुकी थी। उसे जिला अस्पताल फिर भोपाल हमीदिया भेजा गया। वहां से भी माता-पिता बच्ची को वापस पिपरिया ला रहे थे। रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
Published on:
27 Apr 2023 11:23 am
बड़ी खबरें
View Allनर्मदापुरम
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
