नागौर. बिखरी गंदगी के बीच तेज हवाओं में उड़ते कचरे के टुकड़ों के बीच केन्द्रीय बस स्टैण्ड मंगलवार को पूरी तरह से लावारिश नजर आया। इतना ही नहीं, स्टैंड पर लावारिश पशु और भेडिये सरीखे कुत्तों की दबंगई से सहमते यात्री…! यह दृश्य अप्रत्याशित रूप से विजयबल्लभ चौराहा स्थित नागौर आगार का रहा। फिर भी उच्चाधिकारियों की नजर में आल इज वेल…! यात्रियों को पूरी सुविधा दिए जाने के दावे अलग से किए जाते हैं। विशेष बात यह रही बस स्टैंड पर अजमेर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे कुछ यात्रियों के खाने तक यह गंदगी पहुंची तो उनकी शिकायत सुनने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी तक बस स्टैण्ड पर नहीं मिला।
परेशान हो रहे यात्री
नागौर आगार के स्टैंड परिसर में प्रवेश करने पर कौन सी बस कहां जाएगी, इसकी किराया सूची व बसों के जाने के रूटचार्ट, जो रात्रि में भी चमकते रहें, ऐसे बोर्ड या प्रबन्ध पूरे स्टैंड परिसर में कहीं भी नजर नहीं आते हैं। यात्री आने पर बुकिंग विंडों में जाकर पूछेगा, तभी उसे बसों के बारे में जानकारी मिल सकेगी। यह स्थिति रात्रि में बेहद गंभीर हो जाती है। शाम को आठ बजे के बाद से पूरे स्टैंड परिसर में सन्नाटे की स्थिति बनने लगती है। नौ से 11 बजे तक तो यहां पर जानकारी लेने या बसों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की जानकारी देने के लिए कोई नजर नहीं आता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि शिड्यूल में एक कर्मचारी की ड्यूटी लगी रहती है, लेकिन यात्रियों को यह कर्मचारी कहीं नजर नहीं आता है।
केस नंबर एक: बिखरे कप
दोपहर में बस स्टेंड में प्रवेश करने पर चाय पीकर फेके गए खाली कप बिखरे मिले। इस दौरान कई जगहों पर पालीथिन की छोटी पन्नियों में लिपटी गंदगी के वायरस मिले। स्वच्छता अभियान का यहां पर कोई असर नजर नहीं आया। दुकानों पर खुले में बिना ढंके रखी कचौरियां सहित अन्य सामग्री खुद-ब-खुद स्वास्थ्य सुरक्षा के मापदंडों को अंगूठा दिखाती नजर आई। जबकि बगल में ही अधिकारियों का कार्यालय भी है। इसके बाद भी अव्यवस्था की अप्रत्याशित तस्वीर यात्रियों को हैरान करने के साथ ही परेशान करती रही।
केस नंबर दो: डस्टबीन से बिखरती गंदगी
बस स्टैंड के मुख्य हिस्से में पहुंचने पर डस्टबीन में कुत्ते अपना भोजन तलाश करते नजर आए। इसमें दो कुत्ते कचरे में से यात्रियों के फेंके गए खाने के अवशेष लेकर बस स्टैण्ड के प्लेटफार्म पर चला गया। आराम से यात्रियों के बीच यह गंदगी फैलाता रहा, लेकिन इसे हटाने वाला कोई जिम्मेदार नजर नहीं आया। थोड़ी ही देर में बस स्टैंड परिसर में यात्रियों के बैठने वाली जगह पर यह गंदगी बिखर गई। इसके चलते वहां बैठे यात्री दूसरी जगह चले गए।
केस नंबर तीन: प्याऊ पर भी गंदगी
बस स्टैंड परिसर में हजारों यात्रियों की सुविधा के लिए एक प्याऊ लगा मिला। इसमें केवल एक नल से पानी हल्का-हल्का आ रहा था। जबकि दूसरी नल की टोंटी खोलने पर बेकार मिली। इसमें भी गंदगी के चलते दुर्गन्ध रही। इसे देखने से साफ लग रहा था कि सालों से इसकी सफाई नहीं कराई गई।
केस नंबर चार: आवश्यकता हो तो बाहर जाना पड़ता है
बस स्टैंड पर लगा एकमात्र ईमित्र प्लस भी बंद मिला। आवश्यकतानुसार यात्री इसका प्रयोग भी करना चाहे तो नहीं कर सकते। ऐसे में बैकिंग से जुड़े कार्यों के लिए अक्सर यात्रियों को बाहर जाना पड़ता है। इस संबंध में बुकिंग विंडों के कर्मी से बातचीत कर जानने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इसके साथ ही यहां पर वात्सल्य कक्ष के लिए एक केबिन लगी जरूर मिली, लेकिन इसकी हालत बेहद खस्ता रही।
कुर्सियों की बिगड़ी हालत
भामाशाहों की ओर से बस स्टैंड पर मिली कुर्सियों की हालत भी जीर्ण-शीर्ण हालत में मिली। बस स्टैंड के मुख्य गेट के निकट वाली जगहों पर तीन कुर्सियां रखी तो हैं, लेकिन इनकी हालत देखकर लग रहा था कि जैसे कचरे में रखी हुई हों। प्लेटफार्म के पास ही खाली बोतल के साथ एकत्रित गंदगी का ढेर मिला। इसके नजदीक ही कचरा डाले जाने वाले डस्टबीन की हालत बेहद खराब मिली। यात्रियों के ठीक नजदीक रखे होने के कारण यात्री असहज नजर आए।