
नागौर. मौसम में उतार-चढ़ाव से मौसमी बीमारियां घर-घर पांव पसारने लगी हैं। दिन में धूप और रात में ठंड से बुखार, खांसी, जुकाम के साथ गले में संक्रमण के मरीजों की अस्पतालों में संख्या बढऩे लगी है। जिला मुख्यालय के जेएलएन राजकीय अस्पताल में रिकॉर्ड तोड़ मरीज पहुंचे। सोमवार को एक ही दिन में जेएलएन अस्पताल व एमसीएच विंग की ओपीडी व आईपीडी 2300 से अधिक पहुंच गई, वहीं मंगलवार को भी दोनों अस्पतालों की ओपीडी व आईपीडी 1600 से अधिक रही।
गौरतलब है कि होली पर प्रदेश में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के चलते जिले में बारिश व ओलावृष्टि के बाद तापमान में गिरावट आई, जिसका असर अब तक बना हुआ है। रविवार को अधिकतम तापमान में करीब पांच डिग्री की गिरावट दर्ज होने के बाद मंगलवार को नागौर जिले का न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो पश्चिमी राजस्थान का सबसे कम तापमान रहा।
बच्चों व बुजुर्गों को ज्यादा खतरा
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को है। बीते एक सप्ताह से जिले में मौसम में बड़े उतार-चढ़ाव आए हैं। दिन में निकल रही धूप से बदन पर गर्म कपड़े रखना मुश्किल हो रहा है, वहीं रात को ठंड का अहसास हो रहा है। दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण लोगों में खांसी, जुकाम, बुखार, सिर दर्द, गले में खराश, खुजली, बीपी एवं डायबिटीज एवं टीबी पीडि़त मरीज इलाज कराने अस्पताल पहुंच रहे हैं।
पिछले पांच दिन में जेएलएन व एमसीएच में आए मरीज
जेएलएन - एमसीएच
दिन - ओपीडी - आईपीडी - ओपीडी - आईपीडी
14 मार्च - 76 - 12 - 46 - 13
15 मार्च - 826 - 44 - 451 - 56
16 मार्च - 314 - 42 - 203 - 33
17 मार्च - 1770 - 45 - 466 - 48
18 मार्च - 1213 - 37 - 390 - 43
ओपीडी में बढ़ रही मरीजों की भीड़
जेएलएन अस्पताल में पिछले दो दिन से सुबह से ही पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टरों को दिखाने, दवा लेने तक मरीजों की लंबी कतार देखी जा रही है। जेएलएन अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अशोक झाड़वाल ने बताया कि मौसम में आए बदलाव से ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिले में ठंड कम होने एवं बढ़ रही गर्मी के कारण मौसमी बीमारियों से ग्रस्त मरीज अस्पताल आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम में गर्भवती महिला, बुजुर्ग एवं बच्चों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
दिन गर्म रातें ठंडी
दिन गर्म, रातें ठंडी, तापमान के बीच बड़ा अंतर, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, खान-पान में बदलाव से कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को यह मौसम अधिक प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि इस दौरान बीमार होने वाले लोगों में एक- दो दिन तेज बुखार, लगातार खांसी, दस दिन बाद भी सूखी खांसी, पसलियों में दर्द, थकावट खासकर शाम को, गले में दर्द और बैचेनी, नाक बंद होना, कान में दर्द की शिकायत रहती है। ऐसे में मरीज इस बीमारी से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय मौसम का जरूर ध्यान रखें।
स्वास्थ्य का ध्यान रखें
मौसम में आ रहे उतार-चढ़ाव के कारण वायरल फैल रहा है। इसके चलते खांसी, जुकाम, बुखार, सिर दर्द, गले में खराश, खुजली आदि के मरीज बढ़ रहे हैं। मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह से ही दवा लें एवं उचित जांच करवाएं।
- डॉ. सहदेव चौधरी, एमडी फिजिशियन, जेएलएन अस्पताल, नागौर
Published on:
19 Mar 2025 11:01 am
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