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कथित रूप से मिलीभगत के खेल में रोडवेज के राजस्व को लगा रहे चूना…VIDEO

नागौर. रोडवेज के कथित रूप से मिलीभगत के खेल के चलते निजी बसों का संचालन अवैध रूप से धड़ल्ले से किया जा रहा है। स्थिति यह है कि केन्द्रीय बस स्टैंड एवं इसके आसपास के चौराहों के साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में बुकिंग विंडों के निकट बिना परमिट बसों का संचालन रोजाना निगम […]

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नागौर. रोडवेज के कथित रूप से मिलीभगत के खेल के चलते निजी बसों का संचालन अवैध रूप से धड़ल्ले से किया जा रहा है। स्थिति यह है कि केन्द्रीय बस स्टैंड एवं इसके आसपास के चौराहों के साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में बुकिंग विंडों के निकट बिना परमिट बसों का संचालन रोजाना निगम को लाखों के राजस्व की चपत लगा रहा है। इसके बाद भी केन्द्रीय बस स्टैंड के मुख्य प्रबंधक की नजर में आल इज वेल है।
नागौर परिवहन विभाग के एरिया में रोडवेज अधिकारियों की सुस्ती ने निजी बसों के साथ ही अन्य सवारी वाहनों ने रोडवेज के राजस्व की रफ्तार पर ग्रहण लगा दिया है। इसकी वजह से रोडवेज के प्रभावित राजस्व का आंकड़ा अब लाखों से करोड़ों में पहुंचने लगा है। स्थिति यह हो गई है कि इनका संचालन रोडवेज बसों के समानांतर चलने से स्थिति अब निगम के लिए हालात और ज्यादा खराब होने लगे हंै। जानकारों के अनुसार प्राइवेट बस सेवा का संचालन नागौर, मेड़ता, जायल, डेगाना, रियाबड़ी, खींवसर, गोटन व डेगाना आदि में बेखौंफ बस स्टैंडों के निकट ही समानांतर बसों को खड़ी कर किया जाने लगा है।
रोडवेज के समानांतर चल रहे निजी सवारी वाहन
नाागौर आगार से करीब 80 बसों का चालन किया जाता है। इनमें औसतन अनुबंधित बस सेवा को निकाल दिए जाने पर निगम की स्थिति प्राइवेट बसों की संख्या के अनुपात में एक तिहाई के बराबर ही रह जाती है। नागौर से अजमेर, जोधपुर, गुजरात, जयपुर सहित कई बड़े शहरों में रोडवेज बस सेवा के रूट पर इससे पांच गुना ज्यादा बसों का संचालन किया जा रहा है। प्राइवेट बस सेवा का संचालन निगम के रूटों पर ही किए जाने से स्थिति बिगड़ी है।
इस पर नहीं दिया जा रहा ध्यान
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार प्राइवेट बस सेवा उनके मुख्य बस स्टैंड एवं बुकिंग विंडो के आसपास से किया जाता है। जहां पर निगम की बसें यात्रियों के लिए खड़ी होती है, वहीं पर प्राइवेट बस सेवा की बसें भी खड़ी कर दी जाती है। कई बार निगम की बसों पर बैठे हुए यात्रियों को भी निजी सवारी वाहनों के चालक अपनी गाड़ी में ले जाकर बैठा देते हैं। इसको लेकर आए दिन निगम एवं निजी सवारी वाहनों के चालकों के बीच रार भी होती रहती है।
आंकड़ों पर नजर
प्राइवेट सेवा बसों की संख्या-700 से भी ज्यादा
निगम के बसों की संख्या-80
निगम बस सेवा का प्रतिदिन का प्रभावित राजस्व 4-5 लाख
निगम का प्रतिदिन का राजस्व औसतन-11 लाख लगभग

मिलीभगत के खेल में नहीं हो रही कार्रवाई
केन्द्रीय बस स्टैंड के पास ही स्थित मूण्डवा चौराहा से लेकर विजयवल्लब चौराहा तक खड़े होने वाले प्राइवेट बसों की संख्या तीन दर्जन से ज्यादा रहती है। प्रति घंटे करीब दर्जन भर बसें प्राइवेट सेवा की यात्रियों को लेकर गंतव्यों तक रवाना होती है। जबकि प्रावधान के अनुसार केन्द्रीय बस स्टैंड से कम से कम दो किलोमीटर की दूरी तक निजी बसों का ठहराव नहीं किया सकता है। इसके बाद भी रोडवेेज अधिकारियों के साथ निजी वाहन चालकों से कथित रूप से मिलीभगत के खेल के चलते अब इस संबंध में कोई ठोस कदम विभाग की ओर से नहीं उठाया गया।
इनका कहना है…
रोडवेज का संचालन प्रावधानों के अनुसार कराया जा रहा है। निजी वाहनों के संदर्भ में मुझे कुछ भी नहीं कहना है। इस संबंध में प्रशासनिक बैठक में चर्चा होती है।
मुकुन सिंह, मुख्य प्रबंधक, केन्द्रीय बस स्टैंड नागौर