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नागौर. खरीफ फसलों में कीट एवं रोगों से बचाव के लिए किसान बड़ी मात्रा में कीटनाशक एवं फफूंदनाशी का उपयोग करते हैं, लेकिन छिडक़ाव के दौरान सुरक्षा में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है। प्रदेश में पिछले तीन साल में कीटनाशकों का छिडक़ाव करते हुए 1383 किसानों की मौत हो चुकी है। कृषि विभाग की ओर से दी गई सूचना के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2023 में 467, वर्ष 2024 में 439 और वर्ष 2025 में 477 किसानों की मौत हुई। आंकड़े बताते हैं कि हर साल सैकड़ों किसान कृषि रसायनों के संपर्क में आने से अपनी जान गंवा रहे हैं।
जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो बीकानेर जिले में सबसे अधिक 227 मौतें हुई हैं। इसके बाद हनुमानगढ़ में 192, चूरू में 122, श्रीगंगानगर में 101, झालावाड़ में 92, नागौर और अजमेर में 79-79, ब्यावर व बूंदी में 68-68, जोधपुर में 67 और फलोदी में 43 किसानों की मौत कीटनाशकों का छिडक़ाव करते समय हो गई। ऐसे में कृषि विभाग नागौर के अधिकारियों ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
कृषि विभाग सीकर खंड के अतिरिक्त निदेशक हरीश मेहरा ने किसानों को कीटनाशक एवं फफूंदनाशी के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग की सलाह देते हुए कहा कि सही दवा, सही मात्रा और सही समय पर छिडक़ाव करने से ही बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। जानकारी के अभाव में अधिक मात्रा में दवा डालना, गलत दवाओं को मिलाना अथवा प्रतिकूल मौसम में छिडक़ाव करना किसान और फसल दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
कीट की सही पहचान के बाद ही करें छिडक़ाव
कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने कहा कि किसान खेत में कीट या रोग दिखाई देने पर बिना जानकारी के किसी भी दवा का छिडक़ाव नहीं करें। पहले समस्या की सही पहचान करें और जरूरत होने पर कृषि विभाग के तकनीकी कार्मिक से सलाह लेकर दवा का चयन करें। दवा के पैकेट या लेबल पर लिखी अनुशंसित मात्रा का ही उपयोग किया जाए। अधिक मात्रा में दवा डालने से नियंत्रण बेहतर नहीं होता, बल्कि फसल को नुकसान के साथ किसान का खर्च भी बढ़ता है।
स्प्रेयर की जांच भी जरूरी
छिडक़ाव से पहले स्प्रेयर की जांच कर लेनी चाहिए। नोजल में रुकावट, लीकेज या खराब पंप होने पर दवा का समान छिडक़ाव नहीं हो पाता। स्प्रेयर को साफ करने और आवश्यकतानुसार कैलिब्रेट करने के बाद ही उपयोग करना चाहिए। फसल के सभी हिस्सों तक दवा का पर्याप्त और समान कवरेज पहुंचना भी जरूरी है।
तेज हवा और बारिश में नहीं करें छिडक़ाव
तेज हवा के दौरान छिडक़ाव करने से दवा लक्ष्य फसल से हटकर आसपास के खेतों, पशुओं, मनुष्यों और जल स्रोतों तक पहुंच सकती है। बारिश की संभावना होने पर भी छिडक़ाव से बचना चाहिए, क्योंकि दवा पत्तियों से धुलने के कारण उसका प्रभाव कम हो सकता है। सामान्य परिस्थितियों में सुबह या शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में छिडक़ाव करना बेहतर रहता है।
सुरक्षा उपकरण पहनना जरूरी
किसानों को छिडक़ाव के दौरान दस्ताने, मास्क या उपयुक्त श्वसन सुरक्षा, आंखों की सुरक्षा और शरीर को ढकने वाले कपड़ों का उपयोग करना चाहिए। रसायन त्वचा, आंख और मुंह के संपर्क में नहीं आए, इसका विशेष ध्यान रखें। छिडक़ाव के दौरान खाना-पीना, तंबाकू या बीड़ी-सिगरेट का सेवन नहीं करें। बच्चों और पशुओं को खेत से दूर रखें।
दवाओं को मनमर्जी से न मिलाएं
कीटनाशक, फफूंदनाशी, खरपतवारनाशी या सूक्ष्म पोषक तत्वों को बिना तकनीकी सलाह के एक साथ टैंक में नहीं मिलाना चाहिए। गलत मिश्रण से दवा का प्रभाव कम होने के साथ फसल को नुकसान पहुंच सकता है। छिडक़ाव के बाद हाथ, चेहरा और शरीर को साबुन-पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। खाली दवा की बोतलों का घरेलू उपयोग नहीं करें और उन्हें सुरक्षित तरीके से निस्तारित करें। किसान कृषि रसायन खरीदते समय बिल जरूर लें तथा पैकिंग, लेबल, बैच नंबर, निर्माण व समाप्ति तिथि और सील की जांच करें। खेत की नियमित निगरानी, जैविक एवं यांत्रिक उपाय और आर्थिक क्षति स्तर को ध्यान में रखकर ही रासायनिक नियंत्रण अपनाया जाए। किसी भी कीट या रोग की स्थिति में कृषि पर्यवेक्षक, कृषि अधिकारी या कृषि विभाग के तकनीकी कार्मिक से सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करें।
- शंकरराम सियाक, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, नागौर
Updated on:
09 Aug 2026 12:00 pm
Published on:
09 Aug 2026 12:00 pm
