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खानदेश के कॉटन की गुजरात में भारी मांग, अतिवृष्टि और बोंडाली से उपज घटी

कपास को लेकर 10 को दिल्ली में अहम बैठक 9,500 से 9600 रुपए में बिक रहा कपास, भाव बढऩे के आसार महाराष्ट्र में 15 लाख गांठ उपज कम होने की उम्मीद

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खानदेश के कॉटन की गुजरात में भारी मांग, अतिवृष्टि और बोंडाली से उपज घटी

खानदेश के कॉटन की गुजरात में भारी मांग, अतिवृष्टि और बोंडाली से उपज घटी

मुंबई. भारी-बारिश और बाढ़ से प्रभावित कपास की फसल पर इस साल बोंडाली कीड़ों का कहर टूटा है। इस कारण महाराष्ट्र में इस साल कपास की उपज 15 लाख गांठ कम हो सकती है। अमूमन राज्य में 90 से 92 लाख गांठ कपास का उत्पादन होता है। इस साल 75 लाख गांठ कपास ही बाजार में आनेे की उम्मीद है। अच्छी क्वालिटी की उपज के लिए मशहूर खानदेश के कपास की भारी मांग है। ज्यादातर कपास की खरीद गुजरात के कारोबारी कर रहे हैं। कपास का भाव 9500 से 9600 रुपए के बीच चल रहा है। ऊंचे भाव से किसान खुश हैं। वहीं, कम उपज से उन्हें निराशा भी है। किसानों की नजर नई दिल्ली में 10 फरवरी को होने वाली अहम बैठक पर लगी है।

कपास किसानों-व्यापारियों के साथ रायशुमारी के बाद सरकार कपास आयात शुल्क तय करेगी। चूंकि विदेश में भी कपास की फसल कमजोर है, इसलिए भाव चढऩे की संभावना है। कई किसान पूरा स्टॉक नहीं निकाल रहे हैं। भाव में उछाल की आस में कुछ स्टॉक जमा रखना चाहते हैं।

जिनिंग प्रेसिंग फैक्ट्री ओनर्स एसोसिशन के उपाध्यक्ष अरविंद जैन ने बताया कि खानदेश में कपास की उपज कम हुई है। बिक्री के लिए आ रहा कपास हाथोहाथ बिक जा रहा। कपास उत्पादक अन्य राज्यों से भी अच्छे संकेत नहीं हैं। जैन के मुताबिक अच्छे किस्म के कपास का प्रति गांठ 10 हजार रुपए तक भी भाव मिल रहा है। एक गांठ कपास 170 किलो की होती है।

40 लाख गांठ कम उपज
एसोसिएशन के मुताबिक भारत में सालाना 3.70 करोड़ गांठ कपास का उत्पादन होता है। इस साल 3.40 करोड़ गांठ उपज की ही उम्मीद है। ऐसे में उम्मीद से 40 लाख गांठ कम कपास उपलब्ध होगा। घरेलू जरूरतों के लिए 2.90 करोड़ गांठ की जरूरत पड़ती है। 60 से 70 लाख गांठ निर्यात की जाती है।