दिलचस्प बात यह है कि सोन्या के शावक भी 10 से 15 लाख में बिके। लेकिन बाबू ने सोन्या और उसके एक शावक को नहीं बेचा है और आज उनकी कीमत लाखों रुपयों की बताई जा रही है। पवित्र शहर पंढरपुर (Pandharpur) के पास रहने वाले बाबू मेटकारी पिछले साल तक एक पतरे के घर में रहते थे, जो अब ‘मोदी’ भेड़ के महज एक शावक को बेचकर आलीशान बंगले के मालिक बन गए है। उन्होंने बंगला तो बनवाया ही साथ ही जमीन भी खरीदी है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में सैकड़ों माडग्याल नस्ल की ऐसी भेड़ें हैं। हालांकि, ये जाति की भेड़ें बहुत कम हैं। मेटकारी ने अपने भेड़ को ‘मोदी’ नाम इसलिए दियया था, क्योंकि वह देश के हर बाजार में शीर्ष स्थान रहता था। जहां भी जाता लोग उसके फैन बन जाते थे।
उसी ‘मोदी’ के शावक ‘सोन्या’ की अब हर जगह तूती बोल रही हैं। महज डेढ़ साल के ‘सोन्या’ भेड़ की डिमांड इतनी है कि उसे खरीददार 55 लाख रुपया देकर में अपना बनाना चाहते है। जिस वजह से बाबू मेटकरी एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
छह फीट लंबा, बड़ी गर्दन वाली और अर्धचंद्राकार नाक वाली सोन्या नाम की भेड़ महज डेढ़ साल की उम्र में ही ‘मोदी’ की तरह रुआबदार दिखने लगी है। सोन्या की खुराक भी बेहद तगड़ी है, उसे दिन में दो बार एक-एक लीटर दूध, सरसों खली, मक्का, ज्वार, मूंगफली की बेल खिलाई जाती है।
उसे अक्सर खुले मैदान में भेड़ों के बाड़े में घुमाया जाता है। बाबू मेटकरी अपनी भेड़ों का खूब ख्याल रखते हैं। बाबू मेटकरी सोन्या को बेचना नहीं चाहते, वह कहते है कि मैं इसके शावकों को बेचकर खुश हूँ। सोन्या के अभी 9 शावक है और उनकी बाजार में कीमत 5 से 10 लाख रुपये से शुरू हो रही है। बाबू मेटकरी ने सच साबित करके दिखाया है कि एक भेड़ को बड़ी लग्जरी कार से ज्यादा कीमत मिल सकती है।