मिली जानकारी के मुताबकि, लड़ाई झगड़े की वजह से मासूम बच्ची के माता-पिता अलग रहते थे। कुछ समय बाद दोनों में सुलह-समझौता हो गया और फिर दोनों मुंबई में साथ रहने लगे। एक दिन बच्ची ने अपनी मां को बताया कि पापा ने कुछ गंदी हरकतें की हैं। मां ने उससे पूछा कि किसके साथ की हैं तो इस पर बच्ची ने अपनी कॉपी में लिखकर बताया कि उसके साथ की।
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बता दें कि स्पेशल जस्टिस सीमा जाधव ने आरोपी पिता पर सात हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सीमा जाधव ने कहा कि जिला कानूनी सहायता सेवा प्राधिकरण को जांच करने का आदेश दिया जाता है और अगर जांच से पता चलता है कि पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिला है तो उनके मामले को नियमानुसार मुआवजे के लिए भेजा जाए। विशेष लोक अभियोजक वीणा शेलार ने जिन पांच गवाहों का हवाला देते हुए अभियुक्तों को सजा दिलाने की मांग की, उनमें नाबालिग बच्ची और उसकी मां शामिल थीं। दोनों ने अभियोजन पक्ष के मामले का सपोर्ट किया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, बच्ची के पेरेंट्स की शादी साल 2003 में हुई थी। उनके एक बेटा और एक बेटी है। बाद में पति-पत्नी में झगड़ा हुआ। बेटी के पैदा होने के बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे। आरोपी जहां अपने बेटे के साथ वाराणसी में था तो वहीं पत्नी अपनी बेटी और मां के साथ मुंबई में रहती थी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, साल 2016 में बच्ची और उसकी मां आरोपी पिता से मिलने वाराणसी गए थे। अपने बच्चों के भविष्य का ख्याल करते हुए माता-पिता में सुलह हो गई और पिता बेटे को लेकर वापस मुंबई चला गया। पीड़ित मां ने कोर्ट को बताया कि जब वह आरोपी पति के साथ रहने लगी तो उसकी बेटी उसके साथ सोने लगी। आरोपी पिता उसके मोबाइल में अश्लील वीडियो देखता था।
मां ने बताया कि जल्द ही उन्होंने देखा कि उनकी बेटी हमेशा आरोपी से डरी रहती है और बात करना बंद कर देती है। इसके बाद 30 जुलाई 2017 को जब उसने बच्ची से बात करने का प्रयास किया तो वह काफी डरी हुई दिखाई दे रही थी। बहुत समझाने के बाद उसने अपने पिता की हरकतों के बारे में बताया। लड़की ने अपनी मां को बताया कि आरोपी ने उसे यौन उत्पीड़न की जानकारी नहीं देने की धमकी दी थी। इसके बाद मां ने अगले ही दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।