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“आजम का दाहिना हाथ हूं, मैं बताऊंगा गुंडागर्दी क्या होती है…” यूसुफ मलिक, जिस पर लगे रासुका को कोर्ट ने रद्द किया

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने रामपुर जेल से मलिक की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। पीठ ने राज्य सरकार को नगरपालिका कर वसूली के मामले में राजनेता के खिलाफ रासुका लगाने के लिए फटकार लगाई।

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Yusuf Malik whom Rasuka was canceled by the court

आजम खान के करीबी कहे जाने वाले यूसुफ मालिक।

सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के नेता यूसूफ मलिक पर NSA जैसे कड़े कानून लगाए जाने के फैसले पर आश्चर्य जताया है। कोर्ट ने राजनीतिक मामलों में इस प्रकार के कड़े कानूनों को न लगाए जाने की बात कही। साथ ही कोर्ट की ओर से सपा नेता पर लगाए गए एनएसए को रद कर दिया गया।

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आइए जानते हैं कि आखिर यह यूसुफ कौन हैं और क्या है पूरा मामला...
सपा नेता आजम खान के करीबी यूसुफ मलिक के दामाद का मकान मुरादाबाद प्रशासन ने सील कर दिया था। यूसुफ पर आरोप लगा कि उन्होंने खुद को गैंगस्टर और आजम का राइट हैंड बताते हुए नगर आयुक्त को जान से मारने की धमकी दी थी। यूसुफ पर आरोप है कि उन्‍होंने नगर निगम की महिला अधिकारी दीपशिखा पांडेय से भी बदसलूकी की थी।

अधिकारी को धमकी देने का आरोप
अपर नगर आयुक्त अनिल कुमार सिंह की तरफ से दी गई तहरीर के अनुसार, सपा नेता युसूफ मलिक ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी थी। कहा था, "गैंगस्टर मामले में जेल जा चुका हूं, आजम खान का दाहिना हाथ हूं। मैं तेरे सरकारी आवास पर सील लगाने आ रहा हूं। गुंडागर्दी क्या होती है, मैं बताऊंगा। इस मामले में सिविल लाइंस पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।

यूसुफ मलिक ने किया था सरेंडर
धमकी देने के इस मामले में युसुफ मलिक ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इसमें यूसुफ, उनके दामाद डेनिल, भाई यूनुस मलिक और अन्य के खिलाफ केस दर्ज हुआ। गिरफ्तारी के बाद फिर मुरादाबाद जिला प्रशासन ने यूसुफ के खिलाफ एनएसए लगा दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक प्रकृति के मामलों में एनएसए लागू नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने नेता पर लगाए गए एनएसए को इस टिप्पणी के साथ रद कर दिया।