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गले मिलने पर स्कूल प्रशासन ने लड़का-लड़की को किया सस्पेंड, हाईकोर्ट ने माना सही कदम

स्कूल में आयोजित एक सिंगिंग प्रतियोगिता जीतने के बाद छात्र ने छात्रा को गले लगकर दी थी बधाई।

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Kapil Tiwari

Dec 17, 2017

Boy And Girl

Boy and Girl Hug in School

तिरुवनंतपुरम: तिरुवनंतपुरम के एक स्कूल में एक छात्र और छात्रा को इसलिए एक हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया है, क्योंकि वो दोनों स्कूल परिसर में ही गले मिले थे। इसके बाद जब ये मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया तो अदालत ने भी स्कूल की इस कार्रवाई को सही ठहराया है। दरअसल, स्कूल की एक शिक्षिका ने 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र और छात्रा को स्कूल फेस्टिवल के दौरान गले मिलते हुए देख लिया था। शिक्षिका ने इस बात की शिकायत स्कूल प्रशासन को कर दी, जिसके बाद दोनों को एक हफ्ते के लिए सस्पेंड कर दिया गया। हैरानी वाली बात तो ये है कि स्कूल की इस कार्रवाई को हाईकोर्ट की तरफ से भी सही ठहराया गया है।

गले मिलकर छात्र ने दी थी जीत की बधाई
पूरा मामला तिरुवनंतपुरम के सेंट थॉमस सेंट्रल स्कूल का है, जहां पर बीते 21 अगस्त को एक सिंगिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता को स्कूल की ही एक छात्रा ने जीता था, जिसके बाद उसके एक 16 साल के दोस्त ने उसे गले लगकर इसकी बधाई दी। एक टीचर ने छात्र और छात्रा को स्कूल की सीढ़ियों के पास गले लगते देख लिया, जिसके बाद उसने इसकी शिकायत वाइस प्रिंसिपल को कर दी। वाइस प्रिंसिपल ने इसे अनुशासनहीनता का मामला मानते हुए दोनों को स्कूल से एक हफ्ते के लिए बर्खास्त कर दिया। इन दोनों की गले लगने वाली फोटोज इंस्टाग्राम पर भी अपलोड की गई, जिसे स्कूल के अन्य स्टूडेंट ने भी देखा।

स्कूल प्रशासन ने छात्र को कहा 'सांड'
स्कूल की इस कार्रवाई के बाद जब छात्र ने अपना पक्ष रखना चाहा तो प्रशासन की तरफ से उनकी एक भी न सुनी गई। छात्र ने बताया कि उससे एक माफीनामा भी लिखवा लिया था और उसके बाद स्कूल से एक हफ्ते के लिए निष्कासित कर दिया। मामला बढ़ा तो छात्र के पिता को स्कूल बुलाया गया। छात्र के पिता का कहना है कि उनके सामने बेटे से स्कूल टीचर ने दुर्व्यवहार किया गया और उसकी इस हरकत को 'सांड' जैसा बताया। इसके बाद छात्र के पिता ने स्टेट कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स से इस मामले में मदद मांगी और मामला कोर्ट पहुंच गया।

केरल हाईकोर्ट की जस्टिस शाहजी पी चाले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्कूल की कार्रवाई को सही माना। कोर्ट ने इस पर सुनवाई की और 12 दिसंबर को बाल आयोग के अंतरिम आदेश को रद्द करते हुए स्कूल के फैसले को सही ठहराया।