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जनता समझ नहीं पाई परिवार नियोजन का अधिकार, तभी तो पहुंच गए सवा सौ करोड़ के पार

देश की एक पूरी जनरेशन 'हम दो हमारे दो' के नारे के साथ पैदा हुई और सुनती भी आई। लेकिन वो जनरेशन इसे पूरी तरह से ना तो समझ सकी और ना ही अपना पाई।

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Kiran Rautela

Jul 11, 2018

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जनता समझ नहीं पाई परिवार नियोजन का अधिकार, तभी तो पहुंच गए सवा सौ करोड़ के पार

नई दिल्ली। हर साल 11 जुलाई को पूरे विश्व में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। आज भी पूरी दुनिया में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है। इस साल विश्व जनसंख्या दिवस की थीम है- 'परिवार नियोजन एक मानव अधिकार है'।

बता दें कि 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस को मनाने का कारण हर सेकंड बढ़ रही आबादी के मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचना है।

गौरतलब है कि इस समय विश्व की कुल जनसंख्या लगभग 760 करोड़ के आसपास है। चीन की जनसंख्या 141 करोड़ है, जो विश्व का सबसे ज्‍यादा जनसंख्‍या वाला देश है। वहीं भारत जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे नंबर का देश है, जिसकी जनसंख्या 135 करोड़ है। अमेरिका 32.67 करोड़ जनसंख्या के साथ तीसरे नंबर पर है।

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आंकड़ों की मानें तो भारत में एक मिनट में 25 बच्चे पैदा होते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर ऐसी ही स्थिती बनी रही तो भारत 2030 तक विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश कहलाएगा और हम चीन से भी आगे निकल जाएंगे।

यूएन ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि सरकार द्वारा चलाए गए कई परिवार नियोजन और परिवार कल्याण कार्यक्रमों के कारण जनसंख्या वृद्धि में कमी आई है। लेकिन फिर भी चीन की तुलना में भारत की जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसका एक कारण प्रजनन दर में वृद्धि बताया गया है।

भारत में परिवार नियोजन को नकारा नहीं जा सकता है क्योंकि इसने देश में जनसंख्या की वृद्धि की समस्या को सुलझाने में काफी मदद की है।

आइए देखते है भारत में परिवार नियोजन के बारे में कुछ बातें-

परिवार नियोजन कार्यक्रम को लागू करने में देश की सरकार ने अहम भूमिका निभाई और कई कार्यक्रम भी चलाए हैं।

बता दें कि भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष1952 में की गई थी और ऐसा कदम उठाने वाला भारत दुनिया को पहला देश बन गया। वर्ष 2011 में परिवार कल्याण कार्यक्रम लागू किया गया जिसमें निम्न कार्यक्रम किए गए-

देश में परिवार नियोजन के लिए चलाए गए प्रोग्राम दुनिया के सबसे पुराने परिवार नियोजन प्रोग्राम्स में से एक है। जहां एक पूरी जनरेशन 'हम दो हमारे दो' के नारे के साथ पैदा हुई और सुनती भी आई। लेकिन वो जनरेशन इसे पूरी तरह से ना तो समझ सकी और ना ही अपना पाई।

परिवार नियोजन प्रोग्राम वैसे तो लंबे समय से चलते आएं हैं और सरकार ने इस पर जमकर काम भी किया। लेकिन फिर भी कई मायनों में ये आज भी पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई। इसका मुख्य कारण गर्भनिरोधक तरीकों की सही समझ, जानकारी और उपयोग की कमी बताई जा रही है।

हालांकि भारत सरकार द्वारा चलाई गई जनसंख्या की नीतियों में से परिवार नियोजन को हमेशा से ही आगे रखा गया। लेकिन अभी भी भारत को एक लंबा रास्ता तय करना है। अभी भी सार्वजनिक जागरूकता और सार्वजनिक भागीदारी की आवश्यकता है। बेटियों से ज्यादा बेटों को प्राथमिकता, भारतीयों की परंपरागत, विचार प्रक्रियाएं जैसे कारण पूरे देश में गरीब परिवार नियोजन प्रथाओं को जारी रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

परिवार नियोजन परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार और माता एवं उसके बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


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