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राजसमंद

भूरी को राम जैसे उद्धारक का इंतजार!

पांच वर्षों में अकड़ गया शरीर, चलने फिरने को हुई मौहताज, देलवाड़ा के मुजेला बस्ती का मामला

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अश्वनी प्रतापसिंह @ राजसमंद. उसका शरीर धीरे-धीरे ऐसा अकड़ा कि अपंग जैसी हो गई है। न चल कर शौच जा सकती है और न अन्य काम कर सकती है। कोई बैठा दे तो बच्चों की तरह बैठे-बैठे खिसकती है। पैर के पंचे तक आगे की ओर मुड़ गए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से उसका उपचार भी नहीं हो पा रहा। मामला देलवाड़ा के मुजेला गांव की भूरी बाई (46) पत्नी लोकर गमेती का है। भूरीबाई जन्म से ऐसी नहीं थी, पांच वर्ष पूर्व वह मजदूरी करती थी, लेकिन धीरे-धीरे उसका शरीर अकडऩे लगा और आज वह चलने फिरने के लिए भी मौहताज हो गई। घर में पति के अलावा कोई नहीं होने से उसका उपचार भी नहीं हो पाया।


पैरों पर खड़े होने की इच्छा
भूरी बाई के दो बेटियां हैं। दोनों की शादी होकर ससुराल चली गईं। अब उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। शरीर अकडऩे के बाद से वह कुछ काम नहीं कर पाती, जिससे पति के ऊपर कमाने, चूल्हा फूंकने के साथ ही उसकी देखभाल की भी जिम्मेदारी है। भूरीबाई अपनी पीड़ा बताते बताते रो पड़ीं। उनका कहना है कि पति के सहारे के बिना वह शौच तक नहीं जा पाती। कोई ऐसा सहारा मिल जाए जो उन्हें पैरों पर खड़ा करवा दे।


नहीं मिल पाया उपचार
लोकर गमेती से जब पूछा गया कि पत्नी को अस्पताल क्यों नहीं ले जाते तो वह बोले, मैं अकेला हूं, पेट पालने के लिए मजदूरी करता हूं। पहले एक दो बार अस्पताल गया भी लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। अब निजी अस्पताल में जाने के लिए पैसे चाहिए।


घर में नहीं है शौचालय!
महिला की स्थिति ऐसी खराब होने के बाद भी उसके घर में शौचालय नहीं है। जिससे समस्या और भी गम्भीर है। शौचालय नहीं होने से रोजाना उसे शौच के लिए गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है।


नहीं मिल रही सरकारी मदद
भूरी बाई का शरीर काम नहीं करता, वह चल फिर नहीं सकती। गरीब और अपंग होने के बावजूद उसे कोई सरकारी लाभ नहीं मिल रहा। उसका कहना है कि अगर कोई आर्थिक मदद मिल जाए तो पति की मदद हो। जिससे उन्हें मेरी देखभाल करने का समय मिल सके।