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2003 – भारत की राजनीति और विदेश नीति में हुए बड़े परिवर्तन

वर्ष 2003 कई मायनों में भारतीय राजनीति और विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण रहा

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जयपुर

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Sunil Sharma

Aug 14, 2017

2003 - indian foreign policy

2003 - indian foreign policy

वर्ष 2003 कई मायनों में भारतीय राजनीति और विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण रहा। इस वर्ष भाजपानीत अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अमरीका के साथ संबंध सुधारने की पहल की। इसके अलावा इस वर्ष पाकिस्तान के साथ भी सीमा विवादों को हल करने के मुद्दे पर काम आरंभ हुआ। हालांकि यह ज्यादा सफल नहीं हो पाया।

पारंपरिक राजनीति से हट कर पहली बार इजरायल और ईरान के साथ भी राजनीतिक संबंध बढ़ाने की पहल हुई। यहीं नहीं गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) समारोह पर ईरान के राष्ट्रपति मुहम्मद खात्मी को मुख्य अतिथी के रूप में आमंत्रित किया गया।

इसी वर्ष प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने श्रीनगर में अपनी पहली रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार, फ्लाइट्स और नए संबंध बनाने के प्रयासों पर जोर दिया। हालांकि 1999 में पाकिस्तान ने भारत की पीठ में छुरा घोपते हुए कारगिल युद्ध की नींव रखी थी जिसमें भारत ने विजय हासिल की।

इसी वर्ष प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को सेंट पीट्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन तथा अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के साथ बैठने का सम्मान मिला। यही नहीं अमरीकी राष्ट्रपति ने वाजपेयी को उनकी न्यूयार्क यात्रा के दौरान डिनर के लिए भी इनवाइट किया। बाद में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मसौदों पर हस्ताक्षर हुए। जिनमें मिसाइल डिफेंस, हाई-टेक ट्रेड, न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर शामिल थे।

इस वर्ष भारत और चीन के संबंधों में भी सुधार आया। भारत ने 2003 में ही तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार किया जिसके बदले में चीन ने सिक्किम को भारत का हिस्सा माना। दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार भी बढ़ा।

खेलों में भी रचा इतिहास

वर्ष 2003 राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से ही नहीं वरन खेलों के लिए भी सुनहरे क्षण लेकर आया। इस वर्ष राहुल द्रविड़ तथा वी.वी.एस लक्ष्मण ने साझेदारी में 300 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया जो कि अपने आप में एक अनूठा रिकॉर्ड है। उनके इस स्कोर के बाद भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की बेहतरीन बल्लेबाजी वाली टीम मानी जाने लगी। इस वर्ष वर्ल्ड कप में भारत फाइनल तक पहुंचा और उपविजेता बना।


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