फसल चक्र को अपनाना भी किसान व मिट्टी दोनों के लिए जरुरी
उन्होंने कहा कि फसल चक्र को भी अपनाना मिट्टी की सेहत व किसान दोनों के लिए जरुरी है। एक ही फसल को बार-बार लगाने से पौषक तत्वों में कमी आती है। तिलहनी फसल जहां किसान ज्यादा ले रहे है वहां सल्फर मिट्टी को देना जरुरी है। खड़ी फसल में स्प्रे करने से सल्फर फसल को मिलता है और फसल ठीक होती है लेकिन जरुरी है कि बोवनी के समय ही सल्फर मिट्टी को दिया जाए। जिससे पौषक तत्वों की मात्रा बनी रहे। जहां अनाज फसल अधिक ली जा रही है वहां पर जिंक की कमी मिट्टी में हो रही है। तीन साल में एक बार मिट्टी की जांच किसानों को कराना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण खाद खेती के दौरान मिट्टी को देना जरुरी है।
सवाल-मिट्टी में पौषक तत्वों की कमी क्यों बन रही है।
जवाब-अनियंत्रित, अनियमित और असंतुलित रसायन उर्वरक व कीटनाशक का उपयोग पौषक तत्वों को प्रभावित कर रहा है।
सवाल-रसायन व कीटनाशको के अधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत पर क्या असर पड़ रहा है।
जवाब-बिना परीक्षण और सलाह के अपने हिसाब से रायायनिक उर्वरक व कीटनाशक का उपयोग करने से मिट्टी में शारीयता और लवणीयता तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में जो सैंपल आ रहे है उनमें यह बात प्रमुखता से आ रही है। इसलिए मिट्टी के साथ खेत में दिए जाने वाले पानी की जांच भी जरुरी है। कीटनाशक से मिट्टी और फसल के साथ बड़े पैमानें पर पर्यावरण को भी नुकसान है।
सवाल-देशी और जैविक खाद के साथ पौषक प्रबंधन का कितना महत्व है।
जवाब-जैविक व रासायनिक खाद का उचित प्रबंधन के अनुसार उपयोग लाभप्रद है। जरुरी है दोनों ही उचित गुणवत्तायुक्त हो। वहीं देशी खाद भी मिट्टी के लिए जरुरी है। इसलिए पशुपालन भी जरुरी है। किसान को पशु को घर में रखना जरुरी है। किसानों ने पशुपालन कम किया तो मिट्टी को देशी खाद भी मिलना कम तेजी से हो रहा है।
सवाल-जिले की मिट्टी में कोन से पौषक तत्व पर्याप्त मात्रा में है।
जवाब-मैगेनिशयम, पोटेशियम, कैलशियम व आयरन पर्याप्त मात्रा में है और वर्तमान में जिले की मिट्टी उपजाऊ होकर खेती के लिए अनुकूल है।
सवाल-जिले की मिट्टी में कोन से पौषक तत्वों की कमी है और क्यों हो रही है।
जवाब-जिले की मिट्टी में सल्फर, जिंक और जैव कार्बन की कमी हो रही है। वहीं एकीकृत पोषक प्रबंधन की भी कमी है।
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