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मिट्टी से कलाकृति करके मूर्तिकार सिखा रहे गणेश प्रतिमा बनाना

ईको फ्रेंडली प्रतिमा के लिए पत्रिका अभियान में हुए शामिल

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मिट्टी से कलाकृति करके मूर्तिकार सिखा रहे गणेश प्रतिमा बनाना

मिट्टी से कलाकृति करके मूर्तिकार सिखा रहे गणेश प्रतिमा बनाना

मंडला/अंजनियां शासकीय महाविद्यालय अंजनिया में इको फ्रेंडली गणेशजी के निर्माण के लिए छात्रों को प्रशिक्षित किया गया। ‘पत्रिका’ के तत्वावधान में शासकीय महाविद्यालय अंजनिया में खतरनाक रसायन युक्त रंग और प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं से दूरी बनाने के लिए विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। साथ ही इस शिविर में उन्हें मूर्ति निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया गया। ताकि विद्यार्थी अपने हाथों से श्रीगणेश की प्रतिमा का निर्माण करें और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। यह प्रशिक्षण स्थानीय मूर्ति कलाकार रीतेश झा ने दिया। ‘पत्रिका’ एवं महाविद्यालय के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ माध्यम से ग्रीन गणेश अर्थात इको फ्रेंडली गणेश अभियान का प्रारंभ किया गया है। जिसके तहत छात्रों को ग्रीन गणेश बनाए जाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया और इन्हीं छात्रों के माध्यम से महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को मिट्टी से गणेश जी की प्रतिमा का किस तरह निर्माण करना है और कैसे विसर्जन करना है, उसकी पद्धति बताई गई। इस अभियान के तहत प्रभारी प्राचार्य प्रतीक श्रीवास्तव, आकाश पटेल, सहायक प्राध्यापक डॉ नवीन हरदहा ने तालाब, नालों, नदियों में होने वाले प्रदूषण एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा कलर युक्त गणेश जी के विसर्जन के बाद होने वाले जल प्रदूषण की जानकारी विद्यार्थियों को दी गई। इस जागरूकता शिविर में प्रतीक श्रीवास्तव प्रभारी प्राचार्य ने छात्रों को अवगत कराया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस एवं तेजाबी कलर से तालाब, नदियों एवं जल में होने वाले प्रदूषण से प्रभाव केवल उनके जल तक नहीं होते वह हमारे घर तक वापस आते हैं। हर व्यक्ति को जल प्रदूषण को रोकने के लिए न्यायालय के निर्देश को पालन करने के लिए सभी छात्रों को प्रेरित किया। जल संरक्षण एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों का उपयोग न करने के लिए छात्र एवं छात्राओं को शपथ दिलाई गई। ‘पत्रिका’ समूह से आये आकाश पटेल ने विद्यार्थियों को अवगत कराया कि वह घर में मिट्टी से गणेश जी बनाने एवं उसे घर में ही गमलों में विसर्जित करने की पद्धति को अपनाएं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि तेजाबी कलर एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस से सबसे ज्यादा नुकसान जलीय जीवों को हो रहा है। उन्होंने अवगत कराया कि जलीय जीव क्या है जल में पाए जाने वाले वह जल जीव जो कि जल में होने वाले खतरनाक जीवाणुओं को खत्म करते है। पानी को शुद्ध करते हैं ऐसे जलीय जीव नष्ट होंगे तो पानी की अशुद्धता बढ़ती चली जाएगी और इंसानी प्रभाव में खतरा पैदा होता चला जाएगा। डिप्थीरिया एवं पीलिया जैसी खतरनाक गंभीर बीमारी से आम लोग बीमार होगें। आवश्यक है कि जलीय जीवो की सुरक्षा की जाए। जागरूकता शिविर में महाविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ स्टॉफ के डॉ शोभा शर्मा, डॉ विजय मौर्य, डॉ गरिमा छाबड़ा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत मे आभार प्रदर्शन सहायक प्राध्यापक राजकुमार सिंगौर ने किया।