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जिले में एचआईवी एड्स के 514 एक्टिव केस

नहीं मिलती सरकारी मदद जाना पड़ता है जबलपुर

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जिले में एचआईवी एड्स के 514 एक्टिव केस

जिले में एचआईवी एड्स के 514 एक्टिव केस

मंडला. जिले में एचआइवी एड्स के मरीज लगातार सामने आ रहे हैं जिसकी प्रमुख वजह वहीं इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता का अभाव है। इसी के साथ संबंधित विभागीय अमले द्वारा इसके संबंध में प्रचार-प्रसार तो किया जा रहा है लेकिन जिले में इस बीमारी के इलाज के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होने से जो लोग इससे ग्रसित हैं वे भी नियमित इलाज नहीं करा पा रहे हैं। उपचार के लिए जबलपुर जाना पड़ रहा है।

पिछले करीब 17 वर्षों में अब तक एचआईवी एड्स के 777 मरीज मिल चुके हैं, यही नहीं समुचित इलाज नहीं मिलने या फिर समय में बीमारी का पता नहीं चल पाने या फिर पूरा इलाज नहीं लेने से इनमें से 144 लोगों की मौत तक हो चुकी है। जिले में एड्स के मरीजों के आंकड़े कम चैकाने वाले नहीं है जानकारी अनुसार जिले में एचआईवी के एक्टिव केस करीब 514 है, जिन्हें लगातार इलाज दिया जा रहा है। इन मरीजों की मॉनिटरिंग भी की जा रही है यदि कोई मरीज बीच में इलाज छोड़ रहा है या फिर नियमित दवाओं का सेवन नहीं कर रहा है तो ऐसे मरीज को नियमित दवा का सेवन करने के लिए समझाईश दी जा रही है।

एआरटी सेंटर अब तक नहीं हुआ शुरू

जिला अस्पताल परिसर में एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। इस सेंटर में एकमात्र लैब टेक्निशियन के रूप में चित्रांश वर्मा अपनी सेवाएं दे रहे हैं कहने के लिए तो ये लैब टेक्निशियन है जिनका काम आने वाले मरीजों से सेम्पल लेकर नमूनों की जांच कर रिपोर्ट देना होता है लेकिन रिपोर्ट के बाद मरीज को इस बीमारी के संबंध में मार्गदर्शन देने के लिए यहां परामर्शदाता का पद तो है लेकिन यह पद पिछले 2014 से अब तक की स्थिति में खाली होने से लैब टेक्निशियन पर ही मरीजों को समुचित परामर्श भी देने का काम कर रहे हैं।

जिले में एक ओर लगातार एचआईवी मरीज सामने आ रहे हैं वहीं संक्रमित मरीजों को इलाज के लिए एआरटी सेंटर रेफर किया जा रहा है और कई सालों से जिला अस्पताल परिसर ही में एआरटी सेंटर शुरू होने की प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है। वहीं जिले राजनीतिक दलों से जुड़े लोग भी इस तरह की जरूरी मांगों को मजबूती से नहीं उठा रहे हैं।

बिछिया से अधिक सामने आ रहे मरीज

एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्र से मिली जानकारी अनुसार बिछिया, मवई क्षेत्र से एचआइवी ग्रसित मरीज अधिक संख्या में सामने आ रहे हैं जिसकी प्रमुख वजह पलायन को बताया जा रहा है। इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या मरीज दूसरे शहर जाते हैं जहां कुछ लोग असुरक्षित यौन संबंध के कारण इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

समय में इलाज से गर्भस्थ शिशु को बचाना संभवएकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्र के लैब टेक्नीशियन चित्रांश वर्मा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को लगातार जांच के लिए प्रेरित किया जाता है। यदि किसी गर्भवती महिला के संक्रमित होने का पता निर्धारित समय के अंदर लग जाता है तो उसका समुचित इलाज शुरू कर दिया जाता है। वर्मा ने बताया कि समय रहते गर्भवती महिलाओं के संक्रमित होने का पता चलने और समय में इलाज शुरू हो जाने से अब तक ऐसे करीब 55 बच्चों को संक्रमित होने से बचाया जा सका है। इसी के साथ बताया गया एसआईवी के प्रति जागरूक करने के लिए जागृति युवा मंच, सोसायटी फार प्रगति भारत जैसे एनजीओ इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
जिला जेल से भी सामने आए मरीज

लैब टेक्निशियन वर्मा ने बताया कि हाल में ही जिले में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम जोरों पर चल रहा है। जिसमें रोजाना बड़ी संख्या में सेम्पलों की जांच की जा रही है। वर्मा ने बताया कि एचआईवी और टीबी जांच केन्द्रों में आपास में सामंजस के साथ काम किया जा रहा है जो मरीज टीबी की जांच के लिए सैंपल दे रहे हैं। उनका एचआइवी टेस्ट किया जा रहा है इस प्रक्रिया के चलते भी हाल ही में एचआईवी मरीज सामने आए हैं। बताया गया कि हाल ही में जिला जेल से भी एक मरीज एचआईवी ग्रसित मिला है। एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द से मिली जानकारी अनुसार जिला जेल में तैनात कंपाउडर को भी इस बीमारी और जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जिसे स्टेण्डर्ड रैपिड किट मुहैया कराई गई है जो यहां कैदियों के सेम्पल लेकर जांच करते हैं इसी प्रक्रिया में एक बंदी के एचआइवी ग्रसित होने का मामला सामने आया है। जिसे इलाज के लिए भेजे जाने की बात कही जा रही है।
एचआईवी की जांच की सुविधा यूं तो जिले के सभी प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध है। कुल 42 एफआईसीटीसी केन्द्रों में एचआईवी की जांच की सुविधा महैया कराई जा रही है। इसके अलावा जिला मुख्यालय में एकीकृत परामर्श एवं जांच केन्द्र में भी जांच की सुविधा के साथ परामर्श भी दिया जा रहा है लेकिन जांच और परामर्श के बाद मरीजों को सबसे जरूरी इलाज के लिए उन्हें जबलपुर एआरटी अर्थात एंटी रिक्ट्रो वायरल थेरेपी सेंटर भेजा जाता है और इसी के चलते कई गरीब, मजदूर वर्ग के लोग इलाज के लिए जबलपुर आना-जाना नहीं कर पाते और उन्हें नियमित इलाज नहीं मिल पाने से ऐसे कई मरीजों की मौत हो जाती है।