
राज्यपाल ने कहा कि गीता का एक-एक श्लोक ज्ञान का भण्डार है। गीता निष्कार्म कर्म का दर्शन है। गीता ज्ञान को प्रकाशमान करती है और छिपी शक्ति को स्वतंत्र करती है। उन्होंने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बच्चे अपने धर्म का पालन करें। इस अवस्था के बच्चों का धर्म शिक्षा ग्रहण करना है। जैसे भगवान राम ने पुत्र धर्म, उनके अनुज लक्ष्मण ने भ्राता धर्म तथा माता सीता ने पत्नी धर्म निभाया, उसी तरह बच्चे अपने कर्तव्य को पहचानें। शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए खेल-कूद में प्रतिभाग करें। राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अपने छात्र जीवन में कक्षा 1 से 11 तक निरन्तर पढ़ाई के साथ-साथ सूर्य नमस्कार का अभ्यास भी किया है।

महाराष्ट्र से पधारे गीता परिवार के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ0 संजय मालपाणी ने बताया कि गीता परिवार पिछले 19 वर्षों से बच्चों के संस्कार शिविर आयोजित कर रहा है। 19 राज्यों में कार्य विस्तार के साथ सूर्य नमस्कार, भगवद्गीता, प्रज्ञा संवर्धन और संस्कारों के अनेक आयामों में गीता परिवार ने पूरे देश में अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं। गीता परिवार बालकों में देशभक्ति, राष्ट्रीयता, चारित्रिक, मानसिक व बौद्धिक उन्नयन करने हेतु प्रतिबद्ध है।