
रक्षाबंधन के एक दिन पहले लखनऊ में खत्म हो गयी मलाई गिलौरी
लखनऊ. रक्षाबंधन पर्व पर मिठाई और रक्षा सूत्र दोनों का गहरा संबंध है। नवाबों के शहर लखनऊ में भाई को राखी बांधने आयी बहनें तरह-तरह की मिठाइयों से भाई का मुुह मीठा कराती हैं। यूं तो लखनऊ में तरह-तरह की मिठाइयां बनती हैं। लेकिन, मलाई पान, मलाई गिलौरी या गिलौरी की बात ही कुछ और है। इसे बिलाई की गिलौरी भी कहते हैं। हर बहन की इच्छा यही होती है कि वह खास मौके पर भाई को गिलौरी पान मिठाई खिलाए। नवाबों के समय से ही यह मिठाई बन रही है। और आज भी इस मिठाई का आकर्षण बना हुआ है। हालत यह है कि रक्षाबंधन से पहले लखनऊ की की मशहूर दुकानों से गिलौरी गायब है। यह आर्डर पर ही मिल रही है। या फिर ऑन लाइन बुकिंग हो रही है।
नवाबों ने पान पर लगाया प्रतिबंध तब हुआ आविष्कार
लखनऊ अपनी जिन खास मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है, उनमें मलाई पान या बिलाई की गिलोरी का स्थान गौरवपूर्ण है। कहा जाता है कि नवाबी दौर में एक बार पान पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लखनऊ में १८०५ में स्थापित रामआसरे की दुकान के मालिक सुमन बिहारी बताते हैं कि नवाब वाजिद अली शाह पान के शौकीन थे। लेकिन, हकीमों ने उन्हें पान न खाने की सलाह दी। फिर तो पूरे लखनऊ में पान पर प्रतिबंध लग गया। लेकिन नवाब साहब को पान की तलब थी। तब सुमन बिहारी के पूर्वजों ने पान गिलौरी का आविष्कार किया। इस मिठाई को खाने के बाद नवाब इसके दीवाने हो गए और पान खाना छोड़ दिया। फिर तो उनके दस्तरख्वान में मलाई गिलौरी शामिल हो गई।
कैसे बनती है मलाई गिलौरी
पान के आकार की मिठाई गिलौरी दूध और मलाई से बनती है। मिठाई को कागज की पतली शीट में सेट करने और पान के आकार में रोल करने के लिए घंटों मेहनत करनी पड़ती है। इसमें सूखे मेवे और मिश्री आदि भरा जाता है। मिठाई मुंह में जाते ही पिघल जाती है। आमतौर पर केसरिया मलाई पान और सादा मलाई पान दो वैराइटी ज्यादा मशहूर हैं। केसरिया मलाई पान में केसर मिश्री और सादा मलाई पान में सादी मिश्री डालती है। खांडसारी शुद्ध होती है। इसे रिफाइन नहीं किया जाता। मलाई गिलौरी तैयार करने के लिए कंडे की भरी पर कड़ाही में दूध को धीमी आंच पर पकाया जाता है। दूध में मलाई जमने के बाद उसकी तीन-चार परत निकालकर बड़ी ट्रे में रखी जाती हैं। फिर तिकोने आकार में काटकर उसमें मिश्री, काजू, बादाम, पिस्ता, केसर, इलायची, खांडसारी चीनी का मिश्रण भरा जाता है।
मुंह में जाते ही घुल जाती है
पान के आकर में लपेटकर, चांदी के वर्क से सजाकर पेश की जाती है। मिठाई मुंह में जाते ही घुल जाती है। एक बार खाने के बाद लोग इसके मुरीद हो जाते हैं। लखनऊ की कई दुकानों पर यह मिठाई मिल जाती है। कीमत 700 रुपए किलो से शुरू होती है और दो हजार रुपए किलो तक जाती है।
Published on:
21 Aug 2021 03:03 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
