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कुष्ठ उन्मूलन दिवस : जानें- क्या है कुष्ठ रोग, लक्षण उपचार और कारण

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काकोरी में 'स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान 2018' में स्वास्थ्य कर्मियों ने खाई कसम, कुष्ठ रोगियों से नहीं करेंगे भेदभाव...

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Jan 30, 2018

Leprosy eradication day

लखनऊ. कुष्ठ रोग (leprosy) का अब लाइलाज नहीं है। समय पर इलाज कर इस संक्रामक बीमारी से निजात पाई जा सकती है। लोगों में यह माइकोबैक्टीरियम लेप्री जीवाणु से फैलता है। इस बीमारी के कारण मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है। विश्व कुष्ठ उन्मूलन दिवस पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काकोरी में आयोजित कार्यक्रम में एनएमए धर्मेन्द्र दीक्षित ने बताया कि शुरुआती अवस्था में आसानी से कुष्ठ रोग का इलाज हो जाता है। लेकिन अगर कुष्ठ रोग अतिसंक्रामक स्थिति में है तो भी लगातार दवाओं के इस्तेमाल से इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। ज्यादातर यह बीमारी कुष्ठ रोगियों के संपर्क में आने के कारण फैलती है।

कुष्ठ लोग भले लाइलाज नहीं है, लेकिन फिर भी समाज में कुष्ठ रोगियों को हीन भावना से देखा जाता है। कुष्ठ रोगी अपने सगे-संबंधियों के बीच भी अपने रोग के बारे में नहीं बताते हैं, जिसके चलते वो समय रहते इलाज के लिए नहीं पहुंच पाते हैं। एनएमए धर्मेन्द्र दीक्षित बताते हैं कि कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन यह रोग हाथ मिलाने या साथ बैठने के नहीं होता है। इसलिए कुष्ठ रोगियों से भेदभान न करके, उनकी मदद करनी चाहिए।

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'स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान 2018
कुष्ठ उन्मूलन दिवस पर मंगलवार को राजधानी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काकोरी में 'स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान 2018' के तहत कार्यक्रम मनाया गया। कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के सभी चिकित्सा अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर एनएमए धर्मेन्द्र दीक्षित द्बारा उपस्थित जन समूह को कुष्ठ रोग कैसे होता है? उसके उपचार व बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

खाई कसम नहीं करेंगे भेदभाव
स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान 2018 के तहत आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा अधिकारियों व कर्मचारियों ने दो मिनट का मौन रखकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान अधिकारियों व कर्मचारियों ने शपथ ली कि वे पूरी ईमानदारी से कुष्ठ रोगियों के लिए काम करेंगे। उनके साथ कोई भेदभाव नहीं करेंगे।

क्या है कुष्ठ रोग
कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्री बैक्टीरिया द्वारा फैलता है। इसी बैक्टीरिया के कारण रोगियों में संक्रमण होता है। माइकोबैक्टीरियम लेप्री बैक्टीरिया रोगी की त्वचा को प्रभावित करता है और तंत्रिकाओं को नष्ट कर देता हैं। इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों की पसीने और तेल की ग्रंथियां सूख जाती हैं। उनमें रोशनी, स्पर्श या दर्द की सनसनी महसूस करने की क्षमता में कमी हो जाती है। यह रोग मांसपेशियों में पक्षाघात पैदा कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप हाथों और पैरों में ऊर्जा की कमी हो जाती है। कुष्ठ रोग मुख्यतया खांसने और छींकने से फैलता है।

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कुष्ठ रोग के लक्षण
त्वचा पर हल्के लाल, गहरे या हल्के स्पॉट/धब्बे हो सकते हैं
ये स्पॉट/धब्बे सुन्न हो सकते हैं
त्वचा के प्रभावित हिस्से के बाल झड़ सकते हैं
हाथ, उंगली या पैर की अंगुली की सुन्न हो सकती है
पलकों के झपकने में कमी
अंधेपन का शिकार

कुष्ठ रोग का उपचार
डब्ल्यूएचओ की सिफ़ारिश के अनुसार, कुष्ठ रोग का प्रभावी उपचार एमडीटी यानी मल्टी ड्रग थेरेपी द्वारा किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एमडीटी की दवा नि:शुल्क उपलब्ध है। प्रारंभिक अवस्था के कुष्ठ रोगियों को एमडीटी दी जाती है, जिसकी एक खुराक 99 फीसदी बैक्टीरिया को मारने में सक्षम है।

वीडियो में देखें- स्वास्थ्य कर्मियों ने खाई कसम, कुष्ठ रोगियों से नहीं करेंगे भेदभाव...