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गोपाल दास नीरज से जुड़ी वो पांच बातें जो शायद कई लोग नहीं जानते, यहां पढ़ें

मशहूर कवि व गीतकार गोपाल दास नीरज के निधन पर सीएम योगी विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज समेत कई बड़ी हस्तियों ने दुख प्रकट किया।

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gopal das neeraj

लखनऊ.

जीवन कटना था कट गया,
अच्छा कटा, बुरा कटा,
यह तुम जानो,
मैं तो यह समझता हूँ,
कर्जा जो मिट्टी का पटना था पट गया।

मशहूर कवि व गीतकार गोपाल दास नीरज के निधन पर सीएम योगी विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज समेत कई बड़ी हस्तियों ने दुख प्रकट किया। सीएम योगी ने गोपाल दास ‘नीरज’ के निधन पर उनकी स्मृति में राज्य सरकार हर वर्ष पांच नवोदित कवियों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। हम आपको कवि गोपाल दास नीरज की जिंदगी से पांच अहम बातें बता रहे हैं-


बेहद गरीबी में पला-बढ़ा परिवार

कवि गोपाल दास नीरज का परिवार बेहद गरीबी में पला-बड़ा। उनके पिता का देहांत कम उम्र में ही हो गया था। उनके फूफाजी हर महीने सिर्फ 5 रुपये भेजते थे, जिससे एटा में रह रहे तीन भाइयों, मां व नानाजी का खर्च चलता था। इतने कम रुपए में खर्चा चलाना बड़ा मुश्किल था लेकिन मुफलिसी के उस दौर में उन्होंने काफी कम पैसों में परिवार चलाया।

पहली कमाई मिली पांच रुपए

कवि गोपाल दास नीरज की पहली कमाई जानकर आप थोड़ा हैरान हो सकते हैं। 1942 में फिरोजाबाद में नीरज को मंच मिला तो काव्यपाठ के लिए 5 रुपये मिले। उन्होंने ‘मुझको जीवन आधार नहीं मिलता है, आशाओं का संसार नहीं मिलता है’ पंक्तियां सुनाईं। उन्होंने कोलकाता में पड़े भीषण अकाल के दौरान नि:शुल्क काव्यपाठ किया। इससे एकत्र राशि को पीड़ितों की सहायता में खर्च किया गया था।

रेडियो ने दिलाई पहचान

कवि के तौर पर लोग नीरज को पहचानने लगे थे लेकिन उन्हें असली पहचान रेडियो ने दिलाई। 1960 के दशक में ऑल इंडिया रेडियो पर पहली बार ‘कारवां गुजर गया...’ गीत प्रसारित हुआ। इस गीत ने गोपालदास नीरज को रातोंरात हीरो बना दिया था। इसके बाद वर्ष 1960 में फिल्मकार आर चंद्रा के आमंत्रण पर उन्होंने फिल्म ‘नई उमर की नई फसल’ में गीत लिखा, ‘नई उमर की नई फसल का क्या होगा’। उन्होंने कई फिल्मों के गीत लिखे।

अटल जैसी थी कुंडली

मशहूर कवि नीरज मंच से कई बार कहते थे, भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी और मेरी कुंडली एक ही है। जब चंद्रमा बदला तो वह प्रधानमंत्री बन गए और मैं गीतकारों की दुनिया में मशहूर हो गया...।नीरज ने एक बार मंच से मशहूर संगीतकार मदन मोहन से जुड़ा वाकया सुनाया था। उन्होंने कहा था, मदन मोहन गजल के मास्टर थे, रिद्म पर ध्यान देते थे। उन्होंने मुझसे दो गाने लिखवाए और चेक दिया, लेकिन वह बाउंस हो गया...। इस पर सभागार में ठहाके गूंज उठे थे।

डाकू ने लूटने से कर दिया था मना

एक वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि नीरज से जुड़ा एक किस्सा यूपी में काफी मशहूर है नीरज एक बार इटावा के किसी गांव से काव्यपाठ करके लौट रहे थे। जीप जंगल से गुजर रही थी कि डीजल खत्म हो गया। घुप्प अंधेरे में दो नकाबपोश डाकुओं ने घेर लिया और अपने सरदार दद्दा के पास ले गए। दद्दा चारपाई पर लेटे हुए थे। डीजल खत्म होने की बात बताई तो दद्दा बोले-पहले भजन सुनाओ, फिर हम मानेंगे। इस पर नीरज ने कई भजन सुनाए। दद्दा ने जेब से सौ रुपये निकालकर दिए और कहा-बहुत अच्छा गा लेते हो।