बालू-मौरंग की कालाबाजारी पर अंकुश वैसे तो हर मानसून सीजन यानी जुलाई, अगस्त और सितंबर में खनन का काम बंद रहता है। ऐसे में जो बालू-मौरंग स्टॉक में होती है वही बाजार में आती है। पहले काला बाजारी के चलते हर साल बारिश के सीजन में बालू-मौरंग के दाम आसमान छूते थे, लेकिन जब से प्रदेश सरकार नई भंडारण पॉलिसी लाई है तब से इसकी कालाबाजारी पर काफी हद तक अंकुश लगा है। अब भंडारण की बालू-मौरंग मानसून सीजन में बाजार में निकालना जरूरी हो गया है।
इस बार नहीं बढ़े दाम इसका नतीजा यह हुआ कि जहां दो साल पहले मानसून सीजन में मौरंग के दाम 150 रुपये घन फुट तक पहुंच जाते थे, वहीं इस बार मौरंग के दाम 78 रुपये घन फुट से ज्यादा नहीं हुए। सरकार ने बालू के 109 और मौरंग के 168 बफर स्टाक के लाइसेंस दिए थे। इनमें बालू 13,24,468 घन मीटर और मौरंग 25,84,186 घन मीटर थी। भंडारण की बालू-मौरंग पर्याप्त मात्रा में बाजार में पहुंचने और मांग इतनी अधिक न होने के कारण इसके दाम इस बार नहीं बढ़े। वहीं मानसून खत्म होने के बाद एक अक्टूबर से प्रदेश की खदानों में खनन काम शुरू हो गया है। प्रदेश में बालू और मौरंग की कुल 546 खदानें हैं।
इतने कम हो सकते हैं दाम बालू-मौरंग के थोक कारोबारियों के मुताबिक इस समय मौरंग के दाम 70 रुपये घन फुट हैं। कुछ ही दिनों में खदानों से आवक बढ़ जाएगी तो इसके दाम 50 रुपये घन फुट तक होने की उम्मीद है। बालू के दाम भी अभी 30 रुपये घन फुट हैं। इसके दाम भी 20 से 25 रुपये घन फुट आने की उम्मीद की जा रही है।